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Shibu Soren: श्राद्ध भोज के लिए नेमरा तैयार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रियंका गांधी हो सकते है शामिल

Shibu Soren: शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज के लिए नेमरा तैयार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रियंका गांधी हो सकते है शामिल, 16-17 अगस्त को भारी वाहनों की नो-एंट्री

Published by Swarnim Suprakash

रांची से मनीष मेहता की रिपोर्ट 

Shibu Soren: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्ध कर्म 16 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में आयोजित होगा। आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन, पुलिस और झामुमो कार्यकर्ता मिलकर तैयारियों में जुटे हैं।

इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और देशभर के विशिष्ट अतिथि को कैबिनेट सचिवालय से निमंत्रण भेजा गया है, जबकि झामुमो जिला कमेटी राज्य के लोगों को निमंत्रण कार्ड भेज रही है।

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ट्रैफिक और सुरक्षा के विशेष इंतजाम

रामगढ़ से नेमरा तक का ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है। 16 और 17 अगस्त को इस रूट पर भारी वाहनों की नो-एंट्री रहेगी। वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नेमरा में दिशोम गुरु के पैतृक घर के 300 मीटर दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

सुरक्षा, तैयारियां और सुविधाएं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं

पुलिस बल, ट्रैफिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुुरुंग-चेकिंग पॉइंट और बैरिकेड्स जगह-जगह लगाए गए हैं।नेमरा तक की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम पूरा हो चुका है। आईडीएल सीमेंट फैक्ट्री और अन्य लोकेशनों पर पार्किंग जोन तैयार किए गए हैं, जहां आने वाले वाहनों को खड़ा किया जाएगा।

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श्राद्ध कार्यक्रम की तयारी

श्राद्ध भोज में 5 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इसके लिए विशाल पंडाल, बैठने की व्यवस्था और भोजन परोसने के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए गए हैं। मेन्यू में पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन शामिल करने के लिए लोगों से परामर्श लिया गया है।ग्रामीणों और झामुमो कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि दिशोम गुरु के संघर्ष, योगदान और आदिवासी अस्मिता को याद करने का अवसर भी है। नेमरा इन दिनों श्रद्धा, भावनाओं और तैयारियों का केंद्र बन गया है।

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