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Parliament Monsoon Session: Pahalgam और Operation Sindoor पर संसद में होगी चर्चा, PM मोदी भी रहेंगे मौजूद, तय हो गई तारीख और टाइमिंग

SIR पर संसद में कोई चर्चा नहीं होगी। सूत्रों का कहना है कि सरकार भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जवाब नहीं दे सकती। बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा का काम सरकार नहीं, बल्कि चुनाव आयोग कर रहा है।

Published by Ashish Rai

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र चल रहा है। इस बीच, ऑपरेशन सिंदूर और बिहार में जारी मतदाता सूची की समीक्षा के मुद्दे पर बड़ी खबर आई है। 28 जुलाई से लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू होगी। लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा लेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

29 जुलाई से संसद के उच्च सदन राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू होगी। सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की चर्चा होगी। विपक्ष की मांग है कि ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद रहें। विपक्ष की मांग है कि इस मुद्दे पर कोई प्रस्ताव न लाया जाए, केवल सामान्य चर्चा हो। इसके साथ ही, बिहार में जारी मतदाता सूची की समीक्षा पर भी बड़ी जानकारी सामने आई है।

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SIR पर नहीं होगी कोई चर्चा

SIR पर संसद में कोई चर्चा नहीं होगी। सूत्रों का कहना है कि सरकार भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जवाब नहीं दे सकती। बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा का काम सरकार नहीं, बल्कि चुनाव आयोग कर रहा है। संसद के दोनों सदनों में बुधवार को लगातार तीसरे दिन एसआईआर और कुछ अन्य मुद्दों पर हंगामे के कारण गतिरोध जारी रहा।

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लोकसभा में सरकार की ओर से पेश किए गए दो विधेयक

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामा कर रहे सांसदों को चेतावनी दी कि सदन में तख्तियाँ लेकर आने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा में दो बार कार्यवाही स्थगित हुई। फिर दोपहर 2 बजे के बाद कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार की ओर से लोकसभा में दो विधेयक पेश किए गए।

उपसभापति की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की मीटिंग

हंगामे के बीच ही खेल मंत्री ने राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक-2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक-2025 पेश किए। वहीं, दूसरी ओर, उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता में राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक हुई। इसमें विपक्ष ने अगले सप्ताह से ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा और उसमें प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति की मांग की। बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी शामिल हुए।

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Ashish Rai

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नई दिल्ली, जनवरी 30: भारत और ईयू मिलकर 2 अरब लोगों, वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक विशाल कदम है। जबकि व्यापार चर्चा लगभग दो दशकों से हो रही थी, 2022 से अधिक गहन चर्चा शुरू हुई और 27 जनवरी 2026 को संपन्न हुई। भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव डॉ. विकास गुप्ता, सीईओ और मुख्य निवेश रणनीतिकार, ओमनीसाइंस कैपिटल के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति को देखते हुए, भारत-ईयू एफटीए प्रतीकात्मक है क्योंकि भारत अमेरिका को निर्यात की जाने वाली अधिकांश वस्तुओं के लिए अन्य बाजार खोजने में सक्षम है। इसे चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन पहलों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। यह समझौता अमेरिका को पीछे धकेलेगा और दिखाता है कि भारत कृषि और डेयरी तक पहुंच पर समझौता नहीं करेगा क्योंकि बड़ी किसान आबादी इन क्षेत्रों पर निर्भर है। सकारात्मक रूप से लिया जाए तो यह दर्शाता है कि भारत उच्च-स्तरीय उत्पादों, जैसे वाइन, या विशिष्ट कृषि उत्पादों, जैसे कीवी आदि तक पहुंच देने के लिए तैयार है। यह एक टेम्पलेट हो सकता है जिसके साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता हो सकता है। समझौते की मुख्य विशेषताएं ईयू के दृष्टिकोण के अनुसार, ईयू द्वारा निर्यात की जाने वाली 96% वस्तुओं पर कम या शून्य टैरिफ होगा, जबकि भारतीय दृष्टिकोण यह है कि 99% भारतीय निर्यात को विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलेगी। लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र फुटवियर, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न-आभूषण एफटीए से कई भारतीय क्षेत्रों को लाभ होने की संभावना है। ईयू लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य के फुटवियर और चमड़े के सामान का आयात करता है। वर्तमान में, भारत इस श्रेणी में ईयू को लगभग 2.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। समझौता लागू होने के तुरंत बाद टैरिफ को 17% तक उच्च से घटाकर शून्य कर दिया जाएगा। इससे समय के साथ भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार हिस्सा हासिल करने में सहायता मिलनी चाहिए। एक अन्य क्षेत्र समुद्री उत्पाद है (26% तक टैरिफ कम किए जाएंगे) जो 53 अरब डॉलर का बाजार खोलता है जिसका वर्तमान निर्यात मूल्य केवल 1 अरब डॉलर है। रत्न और आभूषण क्षेत्र जो वर्तमान में ईयू को 2.7 अरब डॉलर का निर्यात करता है, ईयू में 79 अरब डॉलर के आयात बाजार को लक्षित कर सकेगा। परिधान, वस्त्र, प्लास्टिक, रसायन और अन्य विनिर्माण क्षेत्र परिधान और वस्त्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत को शून्य टैरिफ और 263 अरब डॉलर के ईयू आयात बाजार तक पहुंच मिल सकती है। वर्तमान में, भारत ईयू को 7 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यह इस क्षेत्र में भारतीय निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा हो सकता है। प्लास्टिक और रबर एक अन्य ईयू आयात बाजार है जिसकी कीमत 317 अरब डॉलर है जिसमें भारत की वर्तमान हिस्सेदारी केवल 2.4 अरब डॉलर है। रसायन एक अन्य क्षेत्र है जो 500 अरब डॉलर के ईयू आयात बाजार के लायक है जहां भारत को विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलती है।…

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