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NCERT Class 8 Book Row: एनसीईआरटी की नई बुक पर बवाल, सीजेआई सूर्यकांत ने जताई नाराजगी

NCERT Class 8 Book Row: कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” पर अलग सेक्शन जोड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि न्यायपालिका की छवि खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

Published by Ranjana Sharma

 NCERT Class 8 Book Row: देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी बुक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अंश शामिल किए जाने पर गंभीर नाराजगी जताई. उन्होंने साफ कहा कि किसी को भी न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे.

ऐसे आया मामला सामने

दरअसल, हाल ही में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 23 फरवरी 2026 को कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जारी की. इस पुस्तक में हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका अध्याय के तहत “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक से एक अलग खंड जोड़ा गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया. इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित हुए. सिब्बल ने कहा कि संस्था के सदस्य होने के नाते उन्हें यह जानकर दुख हुआ है कि आठवीं कक्षा के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है. उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया और कहा कि उनके पास पुस्तक की प्रतियां भी उपलब्ध हैं.

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बार और बेंच दोनों चिंतित

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें इस विषय की जानकारी है और इस संबंध में उन्हें कई फोन कॉल और संदेश प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि बार और बेंच दोनों इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं और यहां तक कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी इस पर चिंता जता रहे हैं.

कपिल सिब्बल ने जताई नाराजगी

जब सिब्बल ने उम्मीद जताई कि न्यायालय इस मामले में स्वतः संज्ञान लेगा, तो सीजेआई ने बताया कि वह पहले ही आदेश पारित कर चुके हैं और मामले को स्वतः संज्ञान में लिया जा चुका है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी को भी संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने या उसे बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे. कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि चिंता केवल विषयवस्तु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि भ्रष्टाचार को केवल न्यायपालिका तक सीमित दिखाया गया है, जबकि अन्य संस्थानों-जैसे नौकरशाही, राजनीति या सार्वजनिक जीवन—का कोई उल्लेख नहीं किया गया.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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