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Menstrual Leave in India: क्या आप जानते हैं कि भारत के किन राज्यों में मिलती है पीरियड्स लीव?

Menstrual Leave in India: सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म की छुट्टी को लेकर मना कर दिया है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि भारत के कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर मासिक धर्म की छुट्टी मिलती है. आइए जानते हैं-

Published by sanskritij jaipuria

Menstrual Leave in India: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म अवकाश देने के लिए मना कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताई कि यदि इसे कानूनन अनिवार्य किया गया, तो कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से कतरा सकती हैं. ऐसे में क्या आपको पता है कि भारत में ऐसे राज्य हैं जहां पर मासिक धर्म की छुट्टी मिलती है. आइए जानते हैं-
 
भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ कहे जाने वाले राज्य कर्नाटक ने एक शानदार मिसाल पेश की है. कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के लिए पेड मासिक धर्म अवकाश (Paid Menstrual Leave) को अनिवार्य किया है. ये फैसला उन लाखों महिलाओं के लिए बड़ी राहत है जो हर महीने शारीरिक कष्ट के बावजूद काम पर जाने को मजबूर होती थीं.

किसे और कैसे मिलेगा लाभ?

इस पॉलिसी में वो महिलाएं जो 18 से 52 साल की है वो सभी छुट्टी की हकदार होंगी. हर महीने एक दिन की सवैतनिक छुट्टी मिलेगी. खास बात ये है कि इसके लिए किसी मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी. ये नियम केवल सरकारी दफ्तरों ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होगा. ये छुट्टी अगले महीने के लिए जोड़ी (Carry forward) नहीं जा सकती.

छुट्टी को लेकर उठे थे सवाल

जहां एक तरफ इस फैसले की सराहना हुई थी, वहीं एक बड़ा सवाल उन महिलाओं को लेकर भी था जो असंगठित क्षेत्र (Informal Sector) में काम करती हैं. आंकड़ों के अनुसार:

 इस नीति से औपचारिक क्षेत्र की लगभग 3.5 से 4 लाख महिलाओं को फायदा होगा.
 लेकिन, घरेलू कामगारों, दिहाड़ी मजदूरों और गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर) जैसी लगभग 60 लाख महिलाएं अभी भी इस दायरे से बाहर हैं. जानकारों का मानना है कि इस नीति का विस्तार इन वर्गों तक करना भी बेहद जरूरी है.

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इन देशों में पहले से मिलती है छुट्टी

मासिक धर्म अवकाश का विचार नया नहीं है. जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और स्पेन जैसे देश इसे पहले ही अपना चुके हैं. भारत में भी बिहार और ओडिशा जैसे राज्य सरकारी कर्मचारियों को ये सुविधा देते हैं, लेकिन निजी क्षेत्र (Private Sector) को इसमें शामिल करके कर्नाटक ने एक नई लकीर खींच दी है.

इस फैसले को लेकर समाज में दो तरह की राय देखने को मिल रही है. कुछ लोग इसे लैंगिक समानता और महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकार के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ को डर है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के प्रति भेदभाव बढ़ सकता है. हालांकि, कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने इसे एक प्रगतिशील कदम बताते हुए महिलाओं के हक में एक बड़ी जीत करार दिया है.

 

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