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KAVACH 4.0 Indian Railways: भारतीय रेलवे ने मुंबई डिवीजन, WR के विरार-सूरत सेक्शन में KAVACH v4.0 को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है. KAVACH v4.0 को 30 जनवरी 2026 को ट्रेन नंबर 20907 सयाजी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर मुंबई डिवीजन (WR) के 206 किमी लंबे विरार-सूरत सेक्शन में सफलतापूर्वक चालू किया गया है.
विरार-सूरत सेक्शन में कवच को लेकर जानकारी
-कुल 28 स्टेशनों और 28 ब्लॉक सेक्शन को कवर किया गया.
-रिले रूम/रिले हट में 33 S-कवच उपकरण लगाए गए.
-ऑटो हट/OC में 64 RIU लगाए गए.
-33, 40 मीटर ऊंचे ट्यूबलर जालीदार टावर लगाए गए.
-दोहरी लेन में 412 किमी OFC बिछाई गई.
-त्वरित प्रक्रिया: 02 मई 2025 को लोको ट्रायल पूरा हुआ. 16 अक्टूबर 2025 को ISA ऑडिट पूरा हुआ. 12 जनवरी 2026 को ISA रिपोर्ट मिली. 29 जनवरी 2026 को PCSTE की मंजूरी मिली. 31 जनवरी 2026 को चालू किया गया.
भारतीय रेलवे (Indian Railways) द्वारा मुंबई डिवीजन के इस 206 किमी विरार-सूरत कवच सेक्शन को WR द्वारा विरार से वडोदरा तक चालू किए जा रहे 344 किमी कवच के हिस्से के रूप में चालू किया गया है.
क्या है ‘कवच v4.0’?
कवच 4.0 भारत के स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम का लेटेस्ट, एडवांस्ड वर्जन है, जिसे जुलाई 2024 में रेल सुरक्षा बढ़ाने के लिए मंज़ूरी दी गई थी. SIL-4 मानकों से सर्टिफाइड, यह ऑटोमैटिक रूप से ब्रेक लगाकर टक्कर (आमने-सामने/पीछे से) और सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) को रोकता है. 4.0 में मुख्य अपग्रेड में बेहतर लोकेशन सटीकता, डायरेक्ट इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग इंटीग्रेशन और ऑप्टिकल फाइबर-आधारित स्टेशन कम्युनिकेशन शामिल हैं.
कवच 4.0 की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर
• बेहतर टेक्नोलॉजी: इसमें बेहतर RFID टैग प्रोसेसिंग, बेहतर यार्ड सिग्नल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ डायरेक्ट इंटरफ़ेस जैसी सुविधाएं हैं, जिससे, उदाहरण के लिए, ब्रेकिंग दूरी की ज़रूरत कम हो जाती है.
• स्पीड और सुरक्षा: यह ओवर-स्पीडिंग को कंट्रोल करता है और खराब विजिबिलिटी, जैसे कि घने कोहरे के दौरान लोकोमोटिव पायलटों की मदद करता है.
• तेज़ी से डिप्लॉयमेंट: इसे हाल ही में 96-किमी लंबे बाजवा-अहमदाबाद सेक्शन पर चालू किया गया है और 10,000 लोकोमोटिव को कवर करने की योजना है.
• कंपोनेंट्स: यह ट्रैक पर RFID टैग के नेटवर्क, UHF रेडियो कम्युनिकेशन और लोकोमोटिव में ऑनबोर्ड डिस्प्ले यूनिट का इस्तेमाल करता है.
• इमरजेंसी रिस्पॉन्स: इसमें खतरे के 3000m के दायरे में ट्रेनों को “पूरी तरह से रोकने” के लिए एक ऑटोमैटिक SOS सुविधा शामिल है.
कवच 4.0 हाई-डेंसिटी रूट पर सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर बड़े इंस्टॉलेशन चल रहे हैं.