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देश की इन 4 बेटियों ने राजनीति में गढ़े नए कीर्तिमान; एक बनी PM तो 3 ने संभाली CM की कमान

powerful women in india: हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब भारतीय राजनीति की सशक्त बेटियों ने देश की कमान संभाली तो वे पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गईं।

Published by Ashish Rai

K Kavitha resigned: एक दिन पहले के कविता के पिता और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद के कविता ने बुधवार को विधान परिषद सदस्य पद से अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया। त्यागपत्र देने के बाद उन्होंने (के कविता) ने अपने चचेरे भाई टी. हरीश राव समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं पर तीखा हमला बोला है।

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के कविता ने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर साजिशों के तहत उन्हें टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने रामन्ना से गुहार लगाई और कहा कि पार्टी कार्यालय के अंदर से मेरे विरुद्ध झूठा प्रचार किया जा रहा है।”

भले हीं, के कविता पार्टी और परिवार से बगावत करने को लेकर सुर्खियों में हैं। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब भारतीय राजनीति की सशक्त बेटियों ने देश की कमान संभाली तो वे पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गईं। इनमें प्रमुख नामों में इंदिरा गांधी से लेकर मायावती, जयललिता, इंदिरा गांधी और ममता बनर्जी शामिल हैं।

इंदिरा गांधी

देश की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जिन्हें उनके माता-पिता प्यार से इंदु के नाम से पुकारते थे। स्वतंत्रता संग्राम में वानर सेना की कमान संभालने वाली नन्ही इंदु ने जब देश की बागडोर भी संभाली, तो भारत की पहचान दुनिया में एक मज़बूत राष्ट्र के रूप में हुई। अपने पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद, उन्हें प्रधानमंत्री पद का स्वाभाविक उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को लगता था कि वह सिर्फ़ नाम की प्रधानमंत्री रहेंगी, इसलिए उन्होंने उन्हें ‘गूंगी गुड़िया’ कहना शुरू कर दिया। लेकिन जब इंदिरा गांधी ने पदभार संभाला, तो उनके आत्मविश्वास, समर्पण, नेतृत्व कौशल और निडर कदमों ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

एक बेटी होने के नाते, वह हमेशा अपने माता-पिता से जुड़ी रहीं और अपनी ज़िम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। जब उनकी माँ को टीबी का पता चला और उनके पिता जेल में थे, तो इंदिरा ने लंदन और फिर मसूरी में इलाज के दौरान अपनी माँ की देखभाल की।

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जयललिता

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में अपने कठोर निर्णयों के लिए जानी जाने वाली जयललिता को तमिलनाडु की आयरन लेडी और तमिलनाडु की मार्गरेट थैचर भी कहा जाता था। युवावस्था में ही अपनी माँ संध्या के निधन के बाद, जयललिता को 1982 में पूर्व अभिनेता और नेता एमजी रामचंद्रन राजनीति में लाए। उसी वर्ष उन्हें AIADMK के टिकट पर राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जयललिता ने मुख्यतः 1984 में राजनीति की शुरुआत की, जब इंदिरा गांधी की हत्या हो गई थी और एमजी रामचंद्रन बीमार थे। इसी सहानुभूति का लाभ उठाकर जयललिता ने AIADMK और कांग्रेस का गठबंधन बनाया और चुनाव में कूद पड़ीं।

2001 में जब वह दोबारा सत्ता में आईं, तो उन्होंने लॉटरी टिकटों पर प्रतिबंध लगा दिया। हड़ताल के कारण दो लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया, किसानों को मुफ्त बिजली देना बंद कर दिया गया, राशन की दुकानों में चावल के दाम बढ़ा दिए गए, 5000 रुपये से अधिक आय वालों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए, बस किराए में वृद्धि की गई और मंदिरों में पशुबलि पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

मायावती

बसपा सुप्रीमो और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने भी राजनीती जगत में खूब नाम कमाया है। मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को नई दिल्ली में एक सरकारी कर्मचारी प्रभु दयाल के घर हुआ था। भारतीय राजनीति में विशेष प्रभाव रखने वाली मायावती का पूरा नाम मायावती प्रभु दास है, लेकिन लोग उन्हें बहनजी कहकर ज़्यादा पुकारते हैं। मायावती के 6 भाई और 2 बहनें हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाली मायावती ने बीए, बी.एड और एलएलबी की डिग्री हासिल की और एक शिक्षिका के रूप में काम करना शुरू किया। 1977 में कांशीराम के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने पूर्णकालिक राजनीतिज्ञ बनने का फैसला किया। 1984 में बसपा की स्थापना के समय, कांशीराम के मार्गदर्शन में, वह उनकी कोर टीम का हिस्सा थीं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में, उनके विरोधी भी कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए उनकी प्रशंसा करते हैं।

ममता बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन्हें उनके समर्थक दीदी कहकर संबोधित करते हैं। 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्म लेने वालीं ममता दो बार केंद्र में रेल मंत्री रह चुकी हैं और उन्हें पहली महिला रेल मंत्री होने का गौरव हासिल हैं।

इसके अलावा, ममता केंद्र सरकार में कोयला, मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल राज्य मंत्री के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं। 2011 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में 34 सालों से सत्ता पर काबिज वाम मोर्चे का सफाया कर दिया था, फिर 2012 में प्रतिष्ठित ‘टाइम’ पत्रिका ने उन्हें ‘दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों’ की लिस्ट में स्थान दिया था।

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