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भारत ने दुश्मन के लिए तैयार किया एक और शस्त्र! आज ISRO लॉन्च करने जा रहा ‘अन्वेषा’; अब कहां छिपेगा दुश्मन?

ISRO Space Mission : श्रीहरिकोटा से 12 जनवरी को इसरो पीएसएलवी-C62 मिशन लॉन्च करेगा. DRDO द्वारा विकसित यह उपग्रह भारत की सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को और भी ज्यादा मजबूत करने वाला है.

By: Preeti Rajput | Published: January 12, 2026 8:52:37 AM IST



ISRO Space Mission : इसरो 12 जनवरी को पीएसएलवी-C62 मिशन लॉन्च करने जा रहा है. यह श्रीहरिकोटा से  ‘अन्वेषानामक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-N1) को अंतरिक्ष में भेजा जाना है. DRDO द्वारा विकसित यह उपग्रह भारत की सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को और भी ज्यादा मजबूत करने वाला है. जानकारी के लिए बता दें कि यह पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी, जिसमें कुल 15 उपग्रह शामिल होने जा रहे हैं. इनमें से 8 विदेशी और ध्रुवा स्पेस के 7 उपग्रह भी हैं. यह मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में काफी बड़ी उपलब्धि है.

कब और कहां होगा लॉन्च?

इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे लॉन्च होने वाला है. यह लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से की जाने वाली है. इस मिशन में एडवांस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 को अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला है. इस सैटेलाइट का नाम अन्वेषा‘ दिया गया है. इसे भारत के लिए आसमान में एक और ताकत के तौर पर देखा जा रहा है. 

अन्वेषासैटेलाइट की खासियत

  • अन्वेषा‘ एक खास इमेजिंग सैटेलाइट है.
  • इस सैटेलाइट को डीआरडीओ ने विकसित किया है.
  • इसमें दुश्मन पर सटीक नजर रखने की भी क्षमता है.
  • यह सैटेलाइट अंतरिक्ष से भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और भी ज्यादा मजबूत करेगा.
  • यह मिशन पीएसएलवी का 64वां उड़ान होगी.
  • 18 मई 2025 को हुए पिछले मिशन में रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी थी.

15 सैटेलाइट होंगे लॉन्च

पीएसएलवी-C62 मिशन में 15 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले हैं. इनमें एक मुख्य भारतीय सैटेलाइट और 14 अन्य छोटे पीएसएलवी-C62 मिशन में कुल 15 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले हैं. इनमें एक मुख्य भारतीय सैटेलाइट और 14 अन्य छोटे उपग्रह भी शामिल हैं. 14 में से 8 विदेशी सैटेलाइट हैं. जिन्हें फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन के हैं.

उलटी गिनती हुई शुरू

मिशन के लिए उलटी गिनती शुरु हो चुकी है. लॉन्च के करीब 17 मिनट बाद सभी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा. इस पूरे मिशन की अवधि दो घंटे से अधिक होगी. इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है. चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन (मॉम) और आदित्य-L1 भी इसी रॉकेट में अंतरिक्ष पहुंचे हैं.

 

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