Gujarat UCC Assembly Passed: गुजरात विधानसभा ने लंबी बहस और तीखे राजनीतिक टकराव के बाद ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक 2026’ को बहुमत से पारित कर दिया है. इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कानून बनाया है. सरकार ने इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं.
करीब 8 घंटे चली चर्चा के बाद यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ. सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह सुधारवादी कानून है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इसे पर्याप्त चर्चा के बिना जल्दबाजी में लाया गया.
सरकार का पक्ष: समान कानून, समान अधिकार
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों पर आधारित है और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करने का प्रयास है. इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे निजी मामलों में समान नियम लागू करना है, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म या जाति से हो.
सरकार के अनुसार, इस विधेयक को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों और कई लोकतांत्रिक देशों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है. यह कानून राज्य के सभी निवासियों पर लागू होगा, यहां तक कि उन लोगों पर भी जो राज्य से बाहर रह रहे हैं. हालांकि अनुसूचित जनजातियों और कुछ पारंपरिक समूहों को इससे बाहर रखा गया है.
कानून के प्रमुख प्रावधान
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो नागरिक जीवन के निजी पहलुओं को सीधे प्रभावित करते हैं. विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा, अन्यथा 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. फर्जी, जबरन या धोखाधड़ी से किए गए विवाह पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. बहुविवाह पर भी सख्त सजा तय की गई है. तलाक के मामलों में अब अदालत की मंजूरी अनिवार्य होगी और बिना न्यायिक प्रक्रिया के तलाक को अमान्य माना जाएगा. ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा हो सकती है.
इसके अलावा बेटियों और बेटों को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का प्रावधान इस कानून का अहम हिस्सा है, जो लैंगिक समानता को मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है.
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाया गया है. ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, और ऐसा न करने पर तीन महीने तक की जेल या 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि लिव-इन में रहने वाले व्यक्तियों की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो उनके माता-पिता को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा.
नाबालिगों से जुड़े मामलों में POCSO Act लागू होगा. साथ ही, यदि कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध बनाता है, तो उसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें परित्याग, शोषण और अधिकारों से वंचित होने से बचाया जा सके.
विपक्ष कर रहा विरोध
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी. उनका आरोप है कि यह कानून कुछ समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं में हस्तक्षेप कर सकता है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इसे जल्दबाजी में लाया गया और इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत थी. कुछ नेताओं ने इसे अदालत में चुनौती देने की भी बात कही है.
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