Home > देश > आईएमए के ट्रेनिंग ग्राउंड से सेना मेडल के गौरव तक का सफर, मेजर शिलादित्य सिंह राणावत की शौर्य गाथा

आईएमए के ट्रेनिंग ग्राउंड से सेना मेडल के गौरव तक का सफर, मेजर शिलादित्य सिंह राणावत की शौर्य गाथा

मेजर शिलादित्य सिंह राणावत (Major Shiladitya Sing Ranawat)की कहानी साहस, कर्तव्य के प्रति निष्ठा (Devotion to duty) और भारतीय सेना के गौरव (Pride of Indian Army) के ऊपर पूरी तरह से आधारित है.

By: DARSHNA DEEP | Published: January 12, 2026 11:49:54 AM IST



Major Shiladitya Singh Ranawat’s Inspiring Journey in Uniform: भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर शिलादित्य सिंह राणावत की कहानी आज हर किसी के लिए एक प्रेरणादायक बन चुकी है. उत्तराखंड के देहरादून से शुरू हुई उनकी कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया है.

कैसे शुरू हुई  शिलादित्य सिंह राणावत की कहानी?

उत्तराखंड के देहरादून में स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के प्रशिक्षण मैदानों से शुरू होती है. जहां,  एक युवा कैडेट के रूप में, उन्होंने कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन के बारे में सीखा. इसके साथ ही  उनके लिए वर्दी सिर्फ  एक पहनावा नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का एक संकल्प था. 

तो वहीं, दूसरी तरफ मेजर शिलादित्य सिंह राणावत की यात्रा आईएमए के प्रशिक्षण (IMA Training) से शुरू होकर सेना मेडल प्राप्त करने तक की एक बेहद ही गौरवशाली दास्तां है. जहां, उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों में वीरता का शानदार प्रदर्शन कर मुश्किल से मुश्किल समय में अपनी टीम का नेतृत्व करने का काम किया. इसके साथ ही उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि भारतीय सेना के आदर्श वाक्य ‘सेवा परमो धर्म:’ को पेश करती है और युवाओं को देश सेवा के लिए और भी ज्यादा प्रेरित करती है. 

प्रशिक्षण के बाद किन कठिनाइयों का करना पड़ा सामना?

हालाँकि, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, उन्हें सेना की प्रतिष्ठित यूनिट में नियुक्त किया गया. जिसके बाद उनकी असली परीक्षा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों (Geographical Conditions) और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों (Challenging Operations) के दौरान देखने को मिली.  तो वहीं, मेजर राणावत की वीरता की सबसे बड़ी मिसाल तब सामने आई, जब उन्हें जम्मू-कश्मीर के अशांत क्षेत्रों में एक आतंकवाद विरोधी अभियान का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया गया. 

मेजर शिलादित्य ने अपनी सूझबूझ का कैसे दिया परिचय?

जानकारी के मुताबिक, उनकी टीम ने रात के अंधेरे में घेराबंदी की. जिसके बाद भीषण गोलीबारी के बीच, अपनी जान की परवाह न करते हुए, उन्होंने  रणनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया. इतना ही नहीं उन्होंने न सिर्फ अपने साथियों की जान बचाई, बल्कि आम नागरिकों को भी सुरक्षित निकालकर आतंकियों को मार गिराया.  उनकी इस वीरता के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा सेना मेडल (Sena Medal) से सम्मानित भी किया गया था. 

आज, मेजर शिलादित्य सिंह राणावत लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके है. उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि सफलता सिर्फ पद में नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का है. 

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