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Mahua moitra के कुत्ते के मामले में कोर्ट ने भी जोड़ लिए हाथ, चौंका देगा अंदर की बात

moitra pet dog custody:न्यायमूर्ति मनोज जैन ने महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा और सुझाव दिया कि दोनों अदालत कक्ष के बाहर अपने मतभेद सुलझा लें।

Published by Divyanshi Singh

Mahua moitra: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा से वकील जय अनंत देहाद्रे द्वारा दायर एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उन्हें एक पालतू कुत्ते की कस्टडी से संबंधित मामले को सार्वजनिक करने से रोकने वाले आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने मोइत्रा को अपील पर नोटिस जारी किया और दोनों पक्षों से पूछा कि वे एक साथ बैठकर अदालत के बाहर इस मुद्दे को क्यों नहीं सुलझाते?

अदालत को बताया गया कि मोइत्रा द्वारा निचली अदालत में दायर मुकदमे में पालतू रॉटवीलर ‘हेनरी’ की संयुक्त कस्टडी की मांग की गई थी। देहाद्रे ने निचली अदालत के एकपक्षीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि वर्तमान कार्यवाही का किसी भी तरह से प्रचार न किया जाए। कुछ समय पहले महुआ और जय के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद 2023 में दोनों ने एक-दूसरे पर कुत्ते हेनरी को चुराने का आरोप लगाया था।

मोइत्रा और देहद्राय के बीच रिश्ते अच्छे नहीं

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहद्राय एक समय रिलेशनशिप में थे। उनके अलग होने के बाद दोनों में विवाद हो गया। महुआ मोइत्रा का कहना है कि हेनरी उनका है और उन्होंने कुत्ते की संयुक्त कस्टडी की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, वकील जय अनंत देहद्राय ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें महुआ मोइत्रा के साथ कुत्ते की कस्टडी के विवाद को सार्वजनिक करने से रोका गया था।

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निचली अदालत के आदेश पर जताई आपत्ति

देहद्राय की ओर से पेश वकील संजय घोष ने कहा कि उन्हें निचली अदालत के इस आदेश पर आपत्ति है, क्योंकि इसने दोनों पक्षों को इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बात करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा कि महुआ मोइत्रा की याचिका पर पारित यह आदेश उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले एक्स प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें मामले के बारे में कोई विवरण नहीं था, लेकिन फिर भी इसे अदालत के आदेश का उल्लंघन करार दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया, ‘मेरे खिलाफ एक तुच्छ मामला दर्ज किया गया है और मैं इसके बारे में बात नहीं कर सकती, इस पर चर्चा नहीं कर सकती, इसके बारे में लिख भी नहीं सकती? निष्पक्ष सुनवाई के लिए यह कैसे आवश्यक है? वह एक सांसद हैं, तो क्या एक सांसद सामान्य वादी से अधिक अधिकारों का दावा कर सकता है?’ वहीं, हाईकोर्ट ने बुधवार (3 सितंबर, 2025) को इस मामले में तृणमूल सांसद से जवाब मांगा और अगली सुनवाई दिसंबर में तय की। 

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