Categories: देश

HC के एक फैसले ने बढ़ा दी गौतम गंभीर की मुश्किलें, परिवार पर भी लटक रही तलवार…कहा-कोर्ट में नाम नहीं चलता

Delhi HC On Gautam Gambhir: दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, सोमवार को हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर, उनके फाउंडेशन और परिवार के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

Published by Shubahm Srivastava

Delhi HC On Gautam Gambhir: दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, सोमवार को हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर, उनके फाउंडेशन और परिवार के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बता दें कि यह मामला कोविड-19 काल में दवाओं के कथित अवैध भंडारण और वितरण से जुड़ा है।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने गंभीर की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अब इस मामले की सुनवाई 29 अगस्त को होगी। हालांकि, गंभीर की ओर से दलील दी गई कि अगर उस दिन तक सुनवाई नहीं हुई तो ट्रायल कोर्ट 8 सितंबर को आगे की कार्रवाई करेगा और उनकी पत्नी और मां को भी समन भेजा जा सकता है।

‘कोर्ट में नाम नहीं चलता’

मामले की सुनवाई के दौरान गौतम गंभीर के वकील जय अनंत देहाद्रे ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल (गंभीर) न सिर्फ़ भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और सांसद हैं, बल्कि उन्होंने कोविड-19 के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयाँ बाँटकर लोगों की मदद भी की थी। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप बार-बार नाम और पद ऐसे गिन रहे हैं जैसे इससे फ़ैसला बदल जाएगा। अदालत में ये सब नहीं चलता।”

कोविड काल है मामला?

बता दें कि 2021 में कोविड की दूसरी लहर के दौरान, दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग ने गंभीर, उनके फाउंडेशन और परिवार के खिलाफ बिना वैध लाइसेंस के कोविड दवाओं के भंडारण और वितरण के आरोप में मामला दर्ज किया था।

Related Post

हाईकोर्ट ने फिलहाल कहा कि इस मामले की विस्तार से सुनवाई 29 अगस्त को की जाएगी। तब तक, कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर लगी रोक को बहाल करने से साफ इनकार कर दिया है।

दोषी पाने पर मिल सकती है ये सजा

औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18(सी) और 27(बी)(ii) के तहत बिना लाइसेंस के दवाइयाँ रखना और उनका वितरण करना अपराध है। इसके लिए तीन से पाँच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर और उनकी पत्नी-माँ (ट्रस्टी) के साथ-साथ फाउंडेशन की सीईओ अपराजिता सिंह को निचली अदालत ने तलब किया था। इसके खिलाफ गंभीर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

PM मोदी ग्रेजुएशन डिग्री मामले में दिल्ली HC का बड़ा फैसला, रद्द किया CIC का आदेश…कहा-खुलासा करना अनिवार्य नहीं

Shubahm Srivastava
Published by Shubahm Srivastava

Recent Posts

TG TET Response Sheet 2026: TS TET रिस्पॉन्स शीट 2026 जारी, जानें PDF कैसे करें डाउनलोड?

TG TET Response Sheet 2026: TG TET रिस्पॉन्स शीट 2026 जारी कर दी गई है.…

January 30, 2026

Know Your Tradition: शादी में सोना पहनना क्यों माना जाता है शुभ, जानें क्या कहते हैं शास्त्र

Know Your Tradition: हिंदू विवाह में शादी के समय दुल्हन को सोने के जेवर पहनाएं…

January 30, 2026

Ramadan Facts: रमजान में इन हालात में रोज़ा न रखना है जायज! अल्लाह ने मुसलमानों को दी खास छूट

Ramadan 2026: इस्लाम में रमज़ान के दौरान रोज़ा रखने को लेकर कुछ नियम हैं जिनका…

January 30, 2026