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SIR पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, EC को दिया ये सुझाव, फैसले से तेजस्‍वी-राहुल हो जाएंगे खुश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता ने मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 का भी हवाला दिया है। चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि 2003 में भी गहन पुनरीक्षण किया गया था। यह अभी भी ठीक से चल रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विधानसभा चुनाव नवंबर में हैं। उससे पहले अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। हमारा मानना ​​है कि इस पर विस्तृत सुनवाई की ज़रूरत है। हम SIR पर रोक नहीं लगा रहे हैं।"

Published by Ashish Rai

Bihar Chunav SC Hearing: बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के मुद्दे पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने एसआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और चुनाव आयोग को तीन दस्तावेज़ों – आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड – को स्वीकार करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं में लोकतंत्र से जुड़ा एक अहम सवाल उठाया गया है, जो मतदान के अधिकार से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता चुनाव आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती दे रहे हैं। वे इसे संविधान और कानून के प्रावधानों के विरुद्ध बता रहे हैं।” 

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सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता ने मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 का भी हवाला दिया है। चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि 2003 में भी गहन पुनरीक्षण किया गया था। यह अभी भी ठीक से चल रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विधानसभा चुनाव नवंबर में हैं। उससे पहले अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। हमारा मानना ​​है कि इस पर विस्तृत सुनवाई की ज़रूरत है। हम SIR पर रोक नहीं लगा रहे हैं।”

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आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड स्वीकार करने का सुझाव

न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले पर अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी और उससे पहले सभी पक्ष अपने जवाब दाखिल करें। सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश ने कहा, “आयोग के वकील ने कहा है कि वह केवल 11 दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं। हमारा सुझाव है कि चुनाव आयोग को 3 दस्तावेजों – आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड – को स्वीकार करने पर भी विचार करना चाहिए।”

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, “नागरिकता केंद्र सरकार तय करती है। यहाँ यह अधिकार बूथ स्तर के अधिकारी को दिया गया है। केंद्र सरकार तय करेगी कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं। चुनाव आयोग यह तय नहीं कर सकता।” इस पर, चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील ने कहा, “हम केवल मतदाता का सत्यापन करते हैं। अलग-अलग दस्तावेजों का अलग-अलग महत्व होता है। हमने मतदाता के सत्यापन के लिए 11 दस्तावेजों को मान्यता दी है।”

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