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Explainer: देश के किस राज्य में ग्राउंड वॉटर में सबसे ज्यादा यूरेनियम पाया गया, Annual Ground Water Quality Report 2025 में क्या-क्या है?

Punjab Annual Ground Water Quality Report 2025: सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) की सालाना रिपोर्ट में पंजाब में ग्राउंड वॉटर में सबसे अधिक मात्रा में यूरेनियम कंसंट्रेशन पाया गया है.

Published by Sohail Rahman

Annual Ground Water Quality Report 2025: सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) की सालाना ग्राउंड वॉटर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के मुताबिक पंजाब के ग्राउंड वॉटर में देश में सबसे ज़्यादा यूरेनियम कंसंट्रेशन है, जिससे पानी की सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये नतीजे 2024 के प्री- और पोस्ट-मॉनसून सीज़न के दौरान देश भर में इकट्ठा किए गए 3,754 ग्राउंड वॉटर सैंपल पर आधारित हैं. जानकारी सामने आ रही है कि पंजाब सबसे ज्यादा  प्रभावित राज्य बना हुआ है, जहां मॉनसून से पहले 53.04% सैंपल में यूरेनियम का लेवल तय लिमिट से ज़्यादा था, जो मॉनसून के बाद बढ़कर 62.5% हो गया, जो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स की 30 पार्ट्स पर बिलियन (ppb) की लिमिट से कहीं ज्यादा है.

साल-दर-साल तेजी से हो रही बढ़ोतरी ने इस स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया है. सेफ़ लिमिट को पार करने वाले सैंपल का हिस्सा 2024 की रिपोर्ट में 32.6% से बढ़कर इस साल 62.5% हो गया है — जो 91.7% की चौंका देने वाली बढ़ोतरी है. अगर 2023 की बात करें तो यह आंकड़ा और भी कम होकर 24.17% हो गया, जो लगातार और चिंताजनक बढ़ोतरी दिखाता है.

पंजाब के 16 जिले कंटैमिनेटेड जोन की कैटेगरी में शामिल (16 districts of Punjab are included in the category of contaminated zone)

पंजाब में एनालाइज़ किए गए 296 सैंपल में से प्री-मॉनसून पीरियड के दौरान 157 और पोस्ट-मॉनसून के दौरान 185 में यूरेनियम का लेवल सेफ लिमिट से ज्यादा पाया गया है. इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के 23 में से 16 जिलों को कंटैमिनेटेड जोन की श्रेणी में रखा गया है, जिनमें तरनतारन, पटियाला, संगरूर, मोगा, मानसा, बरनाला, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, फिरोज़पुर, फाज़िल्का, फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, अमृतसर, मुक्तसर और बठिंडा शामिल हैं.

संगरूर और बठिंडा में यूरेनियम कंसंट्रेशन 200 ppb से अधिक रिकॉर्ड किया गया, जो 30 ppb की मंजूर लिमिट से लगभग सात गुना ज्यादा पाया गया है. इसको लेकर विशेषज्ञों द्वारा चेतावनी देते हुए कहा गया है कि ऐसे कंसंट्रेशन से लंबे समय तक टॉक्सिसिटी का खतरा काफी बढ़ जाता है.

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देश का दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य कौन सा है? (Which is the second most affected state in the country?)

हरियाणा देश में दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहां मॉनसून से पहले 10% कंटैमिनेशन से मॉनसून के बाद 23.75% तक तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. ज्यादातर पूर्वी और दक्षिणी राज्य ठीक-ठाक लिमिट में रहने के साथ दिल्ली (13-15.66%) में भी यूरेनियम कंटैमिनेशन पाया गया है, जो पंजाब और हरियाणा के बाद तीसरे स्थान पर आते हैं. इसके अलावा, कर्नाटक (6-8%) और उत्तर प्रदेश (5-6%) में यूरेनियम कंटैमिनेशन पाया गया है. इसके अलावा, अन्य राज्यों की बात करें तो राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मीडियम लेवल की रिपोर्ट मिली है.

यूरेनियम से शरीर को क्या नुकसान होता है? (What harm does uranium cause to the body?)

यूरेनियम एक नैचुरली पाया जाने वाला रेडियोएक्टिव मिनरल है, जो लगातार इस्तेमाल करने पर ऑर्गन को नुकसान पहुंचाने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है. CGWB रिपोर्ट यूरेनियम-कंटैमिनेटेड पानी के लंबे समय तक सेवन को किडनी टॉक्सिसिटी, यूरिनरी ट्रैक्ट कैंसर और खराब न्यूरोलॉजिकल असर से जोड़ती है. पिछली एपिडेमियोलॉजिकल स्टडीज़ से पता चला है कि मीडियम लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से भी किडनी खराब हो सकता है और टिशू को ऐसा नुकसान हो सकता है जिसे ठीक न किया जा सके.

रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा (Shocking revelations in the report)

रिपोर्ट के हवाले से जानकारी सामने आ रही है कि कम गहरे ग्राउंडवाटर में यूरेनियम कंसंट्रेशन में उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से रिचार्ज और डिस्चार्ज साइकिल से प्रभावित होता है, जो मिट्टी की खराब परतों से यूरेनियम को एक्वीफर (पारगम्य चट्टानों, बजरी, रेत, स्लिट की अंडरग्राउंड परत) में घोलते या निकालते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राउंडवाटर में देखी गई ज्यादा यूरेनियम कंसंट्रेशन लोकल जियोलॉजी, इंसानों की बनाई गतिविधियों, शहरीकरण और खेती में फॉस्फेट फर्टिलाइजर के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की वजह से हो सकती है. स्टडीज़ से पता चला है कि फॉस्फेट फर्टिलाइजर में यूरेनियम कंसंट्रेशन 1 mg/kg से 68.5 mg/kg तक होता है.

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क्या है इसका उपाय? (What is the solution to this?)

CGWB ने तुरंत नुकसान कम करने के उपाय करने की मांग की है, जिसमें ग्राउंडवाटर की सख्त मैपिंग, बेहतर वॉटर ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, गहरे बोर से पानी निकालने में कमी, एग्रो-केमिकल कंपोजिशन की मॉनिटरिंग और बड़े पैमाने पर कम्युनिटी अवेयरनेस पहल शामिल हैं.

रिपोर्ट के आखिर में कहा गया है कि भारत का ग्राउंडवाटर आम तौर पर सुरक्षित है, लेकिन नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और मैंगनीज से लोकल कंटैमिनेशन से एनवायरनमेंटल रिस्क पैदा होता है. एनुअल ग्राउंडवाटर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के तहत 2024 का डुअल-सीज़न असेसमेंट इन खतरों की ज़्यादा साफ़ समझ देता है, जिससे टारगेटेड मिटिगेशन स्ट्रेटेजी और पॉलिसी इंटरवेंशन मुमकिन हो पाते हैं. लंबे समय तक ग्राउंडवाटर सस्टेनेबिलिटी और पब्लिक हेल्थ सेफ्टी पक्का करने के लिए लगातार सर्विलांस, सोर्स प्रोटेक्शन और पब्लिक अवेयरनेस बहुत ज़रूरी हैं.

आर्सेनिक की चिंता भी बढ़ी (Arsenic concerns also increased)

पंजाब भी आर्सेनिक से प्रभावित बड़े इलाकों में से एक है, जहां प्री-मॉनसून में 9.1% और पोस्ट-मॉनसून में 9.5% अधिक बारिश हुई है. पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, होशियारपुर और गुरदासपुर में आर्सेनिक के निशान मिले हैं. आर्सेनिक भी एक कुदरती केमिकल एलिमेंट है, जो अपनी ज़हरीली चीज़ के लिए जाना जाता है, और कुदरती सोर्स और माइनिंग, फॉसिल फ्यूल जलाने और खेती जैसी एक्टिविटी से पर्यावरण में पहुंचता है, जिसकी वजह से पानी और मिट्टी दोनों खराब हो जाती है.

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मेडिकल स्टडीज से क्या पता चलता है? (What do medical studies reveal?)

मेडिकल स्टडीज़ से पता चलता है कि लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से आर्सेनिकोसिस होता है, जिसमें स्किन मोटी हो जाती है, रंग बदल जाता है और हथेलियों और तलवों पर घाव हो जाते हैं, जो आखिर में स्किन, फेफड़ों और दूसरे अंगों के कैंसर का कारण बन सकते हैं. आर्सेनिक दिल की बीमारी और डायबिटीज़ के बढ़ते खतरे से भी जुड़ा है. पूरे देश में आर्सेनिक का ज़्यादा लेवल इंडो-गैंगेटिक एल्यूवियल बेल्ट में सबसे ज़्यादा है, जिसमें पश्चिम बंगाल में इसका लेवल सबसे ज़्यादा है, उसके बाद उत्तर प्रदेश और पंजाब का नंबर आता है.

बिहार की क्या स्थिति है? (What is the situation in Bihar?)

बिहार में पानी की क्वालिटी लगातार खराब होती जा रही है. एक रिपोर्ट के हवाले से जानकारी सामने आ रही है कि 30,000 से ज्यादा ग्रामीण वार्डों में पीने का पानी खतरनाक पाया गया है. इससे बड़ी आबादी को गंभीर बीमारियों का खतरा है. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (2024-25) में यह बात सामने आई है. इस रिपोर्ट को इस साल बिहार विधानसभा में पेश किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 38 में से 31 जिलों के लगभग 26% ग्रामीण वार्डों में भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की मात्रा तय सीमा से ज़्यादा है.

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