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सावधान! ये आम बीमारी चुपचाप कर रही आपकी सेक्स लाइफ को बर्बाद, धीरे-धीरे खत्म हो रहा रोमांस

Sex Life Problem: थायराइड की बीमारी बच्चों में भी आजकल आम होती जा रही हैं. इसके वजह से हमारे सेक्स लाइफ पर भी असर पड़ता है.

How Thyroid Affects Your Sex Life: थायराइड की बीमारी बच्चों में भी आजकल आम होती जा रही हैं. अगर किसी बच्चे को हाइपोथायरायडिज्म है, तो हो सकता है कि जन्म के समय उसकी थायराइड ग्रंथि विकसित न हुई हो. यह भी हो सकता है कि पूरी तरह विकसित होने के बाद भी, ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन ना बना पा रही हो. इससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास धीमा हो जाता है. बच्चों में थायराइड असंतुलन के कारण होने वाली समस्याएं वयस्कों जैसी ही होती हैं, लेकिन उनका इलाज अलग होता है. कुछ बच्चों के स्वभाव में बदलाव, स्कूल और अन्य गतिविधियों में कम भागीदारी और पेट दर्द जैसी समस्याएं होती हैं.अत्यधिक नींद आना और थायराइड ग्रंथि का बढ़ना भी इसके लक्षण हैं.

सेक्स को करता है प्रभावित

हार्मोन की कमी शारीरिक और सेक्स के विकास को भी प्रभावित करती है. बच्चे समय से पहले परिपक्व दिखने लगते हैं और उनका वजन बढ़ने लगता है. अगर ये समस्याएं दिखाई दें, तो हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड ग्रंथि से हार्मोन का कम स्राव) का पता टीएसएच और टी4 रक्त परीक्षणों से लगाया जा सकता है. इसके अलावा, बच्चे के हाथों और कलाइयों, और नवजात शिशु के घुटनों की जांच करके हड्डियों के धीमे विकास का पता लगाया जा सकता है.

गर्भावस्था के दौरान जांच करवाएं

गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की जांच करना जरूरी है. इसमें असंतुलन गर्भपात या बच्चे के मानसिक या शारीरिक विकलांगता के साथ जन्म लेने का कारण बन सकता है. जन्मजात थायरॉइड की कमी बच्चे के स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास को प्रभावित करती है. बता दें कि हाइपोथायरायडिज्म आम समस्या है, जो 10% आबादी को प्रभावित करता है. 40-45 वर्ष की आयु में थायरॉइड की जांच जरूरी है.

थायरॉइड को लेकर गलतफहमी

पीजीआई जाने वाले 40 से 50% मरीज थायरॉइड की कमी से पीड़ित होते हैं.आपका वजन तेजी से बढ़ रहा हो या घट रहा हो, हर कोई इसे थायरॉइड की बीमारी मानता है. इन गलतफहमियों के कारण, मरीज अपने थायरॉइड की जांच करवाने के लिए पैक्लीनिकों में जाते हैं और सैकड़ों रुपये खर्च करते हैं. जबकि थायरॉइड का स्तर सामान्य से ऊपर या 10 से नीचे पाया जाता है, दवा की कोई जरूरत नहीं होती है. इसलिए, विशेषज्ञ की सलाह के बिना न तो थायरॉइड की जांच करवानी चाहिए और न ही दवा लेनी चाहिए. सबसे बड़ी गलतफहमी वजन बढ़ने को लेकर है. हालांकि, थायराइड की कमी से वजन कुछ खास नहीं बढ़ता. अक्सर पाँच से सात किलो वजन का अंतर ही देखा जाता है.

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यह गंभीर बीमारी आपको नपुंसक बना सकती है

अगर शरीर का वजन तेजी से घट रहा हो, गर्भधारण में समस्या हो, बांझपन या नपुंसकता हो, बच्चों का विकास न हो रहा हो या शरीर में सूजन हो, तो थायराइड की जांच करवानी चाहिए.

थायराइड की कमी के लक्षण

त्वचा में रूखापन और खुजली, पैरों में झुनझुनी, ठंड लगना, और नाड़ी का धीमा होना, हाथों में कंपन ,वजन बढ़ना, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक पसीना आना, आंखों का उभरना और मांसपेशियों में कमजोरी इत्यादि.

Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. inkhabar इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Shivashakti Narayan Singh

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