ED Seized Money: ED भ्र्ष्टाचार या घोटाले से भरे पैसे का भंडाफोड़ करती है और उसे जब्त कर लेती है. लेकिन क्या आप जानते हैं वो जब्त किया हुआ पैसा ED कहां ले जाती है या उसका क्या करती है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं. दरअसल, ED का ज़ब्त किया हुआ पैसा, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट, मनी लॉन्ड्रिंग और गैर-कानूनी विदेशी लेन-देन जैसे फाइनेंशियल क्राइम की जांच में अहम भूमिका निभाता है. जी हां! आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेड के दौरान, ED के अधिकारी अक्सर बड़ी मात्रा में कैश, प्रॉपर्टी और दूसरे एसेट्स ज़ब्त करते हैं. लेकिन कई लोगों का मानना है कि ED बस इस पैसे को अपने खजाने में रखता है, लेकिन ज़ब्त किए गए पैसे को कैसे हैंडल और स्टोर किया जाता है, इसके लिए सख्त कानूनी और बैंकिंग तरीके हैं. चलिए जान लेते हैं कि वो तरीका क्या है?
ज़ब्त किए गए कैश का क्या करती है ED
जानकारी के मुताबिक, जब ED के अधिकारी रेड के दौरान कैश ज़ब्त करते हैं, तो पैसा तुरंत सरकारी कस्टडी में नहीं लिया जाता है. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों को खास काउंटिंग मशीनों का इस्तेमाल करके कैश गिनने के लिए साइट पर बुलाया जाता है. इतना ही नहीं गिनती का प्रोसेस इंडिपेंडेंट गवाहों की मौजूदगी में होता है. वहीं एक ज़ब्त करने का मेमो भी तैयार किया जाता है. इस डॉक्यूमेंट में ज़ब्त की गई सही रकम दर्ज होती है.
कहां स्टोर किया जाता है पैसा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रकम गिनने के बाद, ज़ब्त किए गए कैश को पूरी तरह से सील कर दिया जाता है और उसी राज्य में SBI की तय ब्रांच में भेज दिया जाता है. इतना ही है फिर पैसा ED के नाम पर खोले गए एक खास पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट में जमा कर दिया जाता है. 2018 से, ये अकाउंट आम तौर पर बिना ब्याज वाले रहे हैं. इससे यह पक्का होता है कि जब तक केस की जांच चल रही है, न तो आरोपी और न ही एजेंसी को ज़ब्त किए गए पैसे से कोई फाइनेंशियल फायदा हो.
कोर्ट का फैसला आने के बाद होता है असली इंतजाम
आप शयद ही ये बात जानते होंगे कि ज़ब्त किया गया पैसा कानूनी प्रोसेस पूरा होने तक बैंक अकाउंट में रहता है. अगर कोर्ट आरोपी को दोषी पाता है, तो पैसा हमेशा के लिए भारत के कंसोलिडेटेड फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है और सरकारी रेवेन्यू का हिस्सा बन जाता है. हालांकि, अगर आरोपी बरी हो जाता है, तो ज़ब्त की गई पूरी रकम वापस करनी होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कानूनी तौर पर तब तक व्यक्ति की प्रॉपर्टी बनी रहती है जब तक कुछ और साबित न हो जाए.