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460 दिनों तक थिएटर में राज करने वाली फिल्म, 70 लाख में बनी लेकिन तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड्स

इस फिल्म का जलवा ऐसा था कि बेंगलुरु के पीवीआर थिएटर में यह लगातार 460 दिनों तक चलती रही,यानी इस फिल्म ने डेढ़ साल तक थिएटर पर अपना जादू चलाया और लोगों को अपनी ओर अट्रैक्ट किया

Published by Anuradha Kashyap

Kannada Film: आजकल के समय में साउथ से लेकर बॉलीवुड तक हर एक फिल्म इंडस्ट्री में फिल्मों को ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। बड़े-बड़े सेट, वीएफएक्स, एक्शन सीक्वेंस और स्टार कास्ट पर अंधा पैसा लुटाया जाता है लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती कि इतना पैसा लगाने के बाद भी वह फिल्म सुपरहिट साबित होगी। कई बार ऐसा होता है कि कहानी पीछे छूट जाती है और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो जाती है, वहीं कुछ छोटी या लो बजट फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा देती हैं। उन्हीं में से एक फिल्म है “मुंगारू मले” जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया।

1 साल से ज्यादा मुंगारू मले ने थिएटर में चलाया अपना जादू

मुंगारू मले फिल्म 2006 में आई थी, यह एक कन्नड़ फिल्म थी जिसने आते ही सबको हैरान कर दिया था। इस फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं था और न ही शानदार सेट थे। इस फिल्म का जलवा ऐसा था कि बेंगलुरु के पीवीआर थिएटर में यह लगातार 460 दिनों तक चलती रही,यानी इस फिल्म ने डेढ़ साल तक थिएटर पर अपना जादू चलाया और लोगों को अपनी ओर अट्रैक्ट किया। मुंगारू मले पहली ऐसी फिल्म बनी जिसने मल्टीप्लेक्स में 1 साल तक चलने का रिकॉर्ड बनाया। इस फिल्म में गणेश और पूजा गांधी जैसे स्टार्स नजर आए थे जिन्होंने अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीत लिया।

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फिल्म का बजट केवल 70 लाख रुपए ही था

फिल्म मुंगारू मले का बजट केवल 70 लाख रुपए था लेकिन इसने अपनी कमाई से सभी को हैरान कर दिया। यह पहली कन्नड़ फिल्म थी जिसने वर्ल्डवाइड 50 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया। कुल मिलाकर इस फिल्म ने लगभग 75 करोड़ रुपए कमाए जिसमें से सिर्फ 57 करोड़ तो कर्नाटक से ही कलेक्ट हुए थे। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता पाई और यह साबित कर दिया कि कम बजट में भी दमदार कहानी के साथ हिट फिल्म बनाई जा सकती है।

इस फिल्म का 12 साल बाद टूटा रिकॉर्ड लेकिन आज भी फिल्म को करते हैं लोग याद

मुंगारू मले कन्नड़ सिनेमा में इतिहास रचने वाली फिल्मों में से एक है। इसके बाद 2016 में इसका सीक्वल भी आया लेकिन इसका रिकॉर्ड केजीएफ चैप्टर 1 ने तोड़ा। मुंगारू मले की कहानी ने यह साबित किया कि सिनेमा की असली ताकत करोड़ों रुपए खर्च करने में नहीं बल्कि इमोशन और दमदार स्क्रिप्ट में होती है। बड़े बजट वाली हर फिल्म हिट नहीं बनती लेकिन एक सच्ची और जुड़ाव वाली कहानी दर्शकों के दिलों पर हमेशा राज करती है। 

Anuradha Kashyap
Published by Anuradha Kashyap

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