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दुनियाभर में डंका बजाकर हुई शादी…अब अलग हो रहीं ये मशहूर एक्ट्रेस? Gold Digger का मिल चुका है टैग, पहले भी पैसों के लिए छोड़ चुकी हैं अपना BF!

Divya Agarwal Divorce Rumours: दिव्या अग्रवाल इन दिनों काफी चर्चाओं में चल रही हैं। उनके तलाक के रूमर्स सामने आ रहे हैं। लेकिन इन अफवाहों के बीच एक्ट्रेस ने खुद सच का खुलासा कर दिया है।

Published by Preeti Rajput

Divya Agarwal Divorce Rumours: मशहूर एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रही हैं। वह अक्सर अपनी लव लाइफ को लेकर कंट्रोवर्सी में रह चुकी हैं। अब एक बार फिर वह अपनी शादी को लेकर चर्चाओं में आ गई हैं। अफवाहें हैं कि दिव्या अग्रवाल का अपने पति अपूर्व पडगांवकर से काफी झगड़ा हो गया है। यह झगड़ा कोई आम झगड़ा नहीं है। खबर तो यहां तक है कि इस झगड़े के कारण कपल एक दूसरे से तलाक तक ले रहा है।

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दिव्या अग्रवाल ने तस्वीर शेयर कर दिया जवाब

वहीं अब इन खबरों पर रिएक्ट करते हुए दिव्या अग्रवाल ने एक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर में जो आदमी नजर आ रहा है, वह और कोई नहीं बल्कि उनके पति अपूर्व ही हैं। तस्वीर दिव्या और अपूर्व की शॉपिंग के समय की है। कपल मिरर सेल्फी लेते हुए नजर आ रहा है। इस तस्वीर के कैप्शन में दिव्या ने लिखा- पोस्ट कर देती हूं। वरना मीडिया सेपरेट बोलेगी। इस तस्वीर पर अपूर्व पडगांवकर कमेंट करते हुए लिखा- अब लोग कहेंगे AI है…

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इंटरव्यू ने दी थी अफवाह को हवाएं।

बता दें कि कुछ समय पहले दिव्या अग्रवाल ने इंटरव्यू दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि-अपूर्व पडगांवकर उनसे शादी करने के लिए तैयार नहीं थे। उनकी इस स्टेटमेंट के बाद हर जगह बस ये अफवाहें थीं कि कपल की शादी ठीक नहीं चल रही है। दोनों जल्द अलग होने वाले हैं। यहां तक कि दोनों तलाव लेने के बारे में भी सोच सकते हैं। हालांकि इन अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। दिव्या अग्रवाल ने अपनी फोटो शयर कर सभी का मजाक बना दिया है।  

Preeti Rajput
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नई दिल्ली, जनवरी 30: भारत और ईयू मिलकर 2 अरब लोगों, वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक विशाल कदम है। जबकि व्यापार चर्चा लगभग दो दशकों से हो रही थी, 2022 से अधिक गहन चर्चा शुरू हुई और 27 जनवरी 2026 को संपन्न हुई। भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव डॉ. विकास गुप्ता, सीईओ और मुख्य निवेश रणनीतिकार, ओमनीसाइंस कैपिटल के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति को देखते हुए, भारत-ईयू एफटीए प्रतीकात्मक है क्योंकि भारत अमेरिका को निर्यात की जाने वाली अधिकांश वस्तुओं के लिए अन्य बाजार खोजने में सक्षम है। इसे चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन पहलों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। यह समझौता अमेरिका को पीछे धकेलेगा और दिखाता है कि भारत कृषि और डेयरी तक पहुंच पर समझौता नहीं करेगा क्योंकि बड़ी किसान आबादी इन क्षेत्रों पर निर्भर है। सकारात्मक रूप से लिया जाए तो यह दर्शाता है कि भारत उच्च-स्तरीय उत्पादों, जैसे वाइन, या विशिष्ट कृषि उत्पादों, जैसे कीवी आदि तक पहुंच देने के लिए तैयार है। यह एक टेम्पलेट हो सकता है जिसके साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता हो सकता है। समझौते की मुख्य विशेषताएं ईयू के दृष्टिकोण के अनुसार, ईयू द्वारा निर्यात की जाने वाली 96% वस्तुओं पर कम या शून्य टैरिफ होगा, जबकि भारतीय दृष्टिकोण यह है कि 99% भारतीय निर्यात को विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलेगी। लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र फुटवियर, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न-आभूषण एफटीए से कई भारतीय क्षेत्रों को लाभ होने की संभावना है। ईयू लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य के फुटवियर और चमड़े के सामान का आयात करता है। वर्तमान में, भारत इस श्रेणी में ईयू को लगभग 2.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। समझौता लागू होने के तुरंत बाद टैरिफ को 17% तक उच्च से घटाकर शून्य कर दिया जाएगा। इससे समय के साथ भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार हिस्सा हासिल करने में सहायता मिलनी चाहिए। एक अन्य क्षेत्र समुद्री उत्पाद है (26% तक टैरिफ कम किए जाएंगे) जो 53 अरब डॉलर का बाजार खोलता है जिसका वर्तमान निर्यात मूल्य केवल 1 अरब डॉलर है। रत्न और आभूषण क्षेत्र जो वर्तमान में ईयू को 2.7 अरब डॉलर का निर्यात करता है, ईयू में 79 अरब डॉलर के आयात बाजार को लक्षित कर सकेगा। परिधान, वस्त्र, प्लास्टिक, रसायन और अन्य विनिर्माण क्षेत्र परिधान और वस्त्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत को शून्य टैरिफ और 263 अरब डॉलर के ईयू आयात बाजार तक पहुंच मिल सकती है। वर्तमान में, भारत ईयू को 7 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यह इस क्षेत्र में भारतीय निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा हो सकता है। प्लास्टिक और रबर एक अन्य ईयू आयात बाजार है जिसकी कीमत 317 अरब डॉलर है जिसमें भारत की वर्तमान हिस्सेदारी केवल 2.4 अरब डॉलर है। रसायन एक अन्य क्षेत्र है जो 500 अरब डॉलर के ईयू आयात बाजार के लायक है जहां भारत को विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलती है।…

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