श्मशान में चिता की राख शरीर पर मली, तो ससुर जी के उड़ गए होश; जानें संजय मिश्रा के दर्द भरे राज़ की पूरी कहानी

Vadh 2 Actor Sanjay Mishra: संजय मिश्रा ने एक पॉडकास्ट अपने स्वर्गीय पिता के साथ मजबूत रिश्ते के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि 'वह श्मशान घाट पहुंच गए और वहां एक जलती अर्थी की अपने पूरे शरीर पर लगा ली थी.'

Published by Preeti Rajput

Vadh 2 Actor Sanjay Mishra: बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा की फिल्म ‘वध 2’ अभी सिनेमाघरों में चल रही है. वह अपनी धमाकेदार एक्टिंग और जबरदस्त फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी हैं. जिनमें से कई सुपरहिट साबित हुई हैं. हाल ही में एक्टर ने एक पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी से जुड़े हुए कई गहरे राज शेयर किए. खासतौर पर उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता के साथ अपने मजबूत रिश्ते के बारे में बताया है. 

पिता की मौत से टूट गए थे एक्टर

शुभंकर मिश्रा के साथ एक इंटरव्यू में, संजय ने अपने पिता की मौत के दुख के समय की एक बहुत इमोशनल कहानी भी शेयर की. दुख से डूबे हुए, वह उस घाट पर गए जहां उनके पिता का अंतिम संस्कार हुआ था और उन्होंने खुद पर राख लगाई – यह देखकर उनके ससुराल वाले बहुत हैरान हुए, जो वहां मौजूद थे. एक्टर ने कहा कि “एक दिन, मेरे ससुर अचानक घर आए, और मैं अपने ड्राइवर के साथ शराब पी रहा था. मैं नशे में था, और मैंने अपने ड्राइवर से मुझे उस जगह ले जाने के लिए कहा जहां मेरे पिता का अंतिम संस्कार हुआ था.” 

राख क्यों मलते थे संजय मिश्रा?

उन्होंने आगे कहा, “मैं घाट पर गया और वहां किसी और की चिता जल रही थी. मैंने उस चिता की राख अपने पूरे शरीर पर लगाई और अपने पिता को पुकारने लगा. लेकिन मेरे पूरे शरीर पर राख लगाने के बाद भी लोग सेल्फी के लिए कहते रहे.” एक्टर ने आगे बताया कि पढाई कभी उनकी ताकत नहीं रही. बचपन में, वह अक्सर घर से भाग जाते थे, जिससे उनके पिता उनके भविष्य को लेकर परेशान रहते थे. “मेरे पापा मेरे भविष्य को लेकर बहुत परेशान थे. उन्होंने मुझसे कहा, ‘संजय, प्लीज 10th क्लास पास कर लो. मैं तुम्हें अपने ऑफिस में वॉचमैन रख सकता हूं.’ यह मानते हुए कि उनका कभी पढाई में मन नहीं लगा, संजय ने सोचा कि क्या होता. “लेकिन मुझे पढाई की परवाह नहीं थी; यह मेरे लिए नहीं बना था. पढाई मेरी जिंदगी का मकसद नहीं थी. अगर मुझे उस समय सितार जैसा कोई इंस्ट्रूमेंट दिया गया होता, तो मैं आज सिंगर या सितारिस्ट होता.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने एक हफ्ते पहले ही एक टाइपराइटर खरीदा है. मेरे पापा चाहते थे कि मैं टाइपराइटिंग सीखूं ताकि मैं टाइपराइटर के तौर पर हर महीने 700 रुपये कमा सकूं. इसलिए, अब, उनकी मौत के कई सालों बाद, मैं टाइपराइटिंग सीख रहा हूं.” 

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संजय मिश्रा के पिता कौन थे?

संजय मिश्रा के पिता का नाम शंभू नाथ मिश्रा था. वह प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो में एक सरकारी पत्रकार के तौर पर काम किया करते थे. पिता के निधन के बाद एक्टर ने फिल्मों से दूरा बना ली थी. वह सबकुछ छोड़कर ऋषिकेश पहुंच गए थे. वह वहां पर एक ढाबे पर काम करने लगे. संजय मिश्रा ने बताया कि उनके पिता क मौत के बाद उन्होंने एक दिन उनकी डायरी पढ़ी थी. जिससे पता लगा कि वह अपने पिता के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गए थे. इस बात से वह काफी दुखी हो गए थे. वह भी पिता से माफी नहीं मांग पाए थे.

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