Eid-Ul-Fitr 2026: जैसा की आप सभी जानते हैं कि मुसलामानों का सबसे पवित्र महीना रमज़ान चल रहा है. वहीं अब कहीं न कहीं फ़िल्म इंडस्ट्री बेसब्री से ईद का इंतज़ार कर रही है. इस बार ईद के मौके पर धुरंधर जैसी कई ब्लॉकबस्टर फ़िल्में रिलीज होने वाली हैं. आपको बता दें कि यह लंबे समय से एक परंपरा रही है कि ईद पर रिलीज़ होने वाली फ़िल्में ज़बरदस्त ओपनिंग करती हैं. खासकर सलमान खान की फ़िल्मों ने ईद पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और बॉक्स ऑफ़िस पर नए रिकॉर्ड बनाए हैं. लेकिन अक्सर कई धर्मगुरुओं ने इस बात पर सवाल खड़े किए हैं कि ईद के दौरान फ़िल्में रलीज नहीं होनी चाहिए? इतना ही नहीं, सवाल उठते हैं कि आखिर ईद के दौरान ही फ़िल्में रिलीज़ क्यों होती हैं वहीं इन्ही बयानों पर सलमान खान के पिता सलीम खान ने जवाब दिया, चलिए जान लेते हैं उन्होंने क्या कहा?
सलीम खान ने बताई वजह
अक्सर सलीम खान अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चाओं में रहते हैं. जब भी फ़िल्मों पर फ़तवा जारी करने या “सच्चा मुसलमान” होने पर बहस छिड़ी, तो उन्होंने साफ़-साफ़ लफ्जों में इसका विरोध किया और करारा जवाब दिया. उन्होंने यह भी साफ किया कि ईद के मौके पर फिल्में क्यों रिलीज होती हैं. एक मौके पर सलीम खान ने साफ किया कि ईद पर फिल्में रिलीज करने का मकसद किसी धार्मिक भावना से टकराना नहीं है, बल्कि त्योहार और पारिवारिक माहौल को और भी हसीन बनाना होता है . उनका कहना है कि, ईद एक ऐसा मौका है जब परिवार एक साथ समय बिताते हैं, और सिनेमा मनोरंजन का एक जरिया बन जाता है.
आखिर क्यों रमज़ान में मुस्लमान फ़िल्में नहीं देखते?
सलीम खान ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि अगर हर मुसलमान को फिल्में देखने से रोक दिया जाए, तो उनका काम अपने आप बंद हो जाएगा. उन्होंने कहा, “फतवा सिर्फ फिल्म बनाने वालों पर ही क्यों है, देखने वालों पर क्यों नहीं? जब से फिल्म इंडस्ट्री बनी है, लोग प्रिंट लेकर बैठे हैं, उन्हें ईद पर रिलीज करने की प्लानिंग कर रहे हैं. मुसलमान रमजान में फिल्में नहीं देखते, लेकिन ईद पर ओपनिंग किसी और प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखती क्योंकि एक फिल्म बनाने में 2 करोड़ या 5 करोड़ रुपये लगते हैं.
ईद का हफ्ता इंडस्ट्री के लिए कितना जरूरी
इसके अलावा उन्होंने आगे कहा, “ईद का हफ्ता फिल्मों के लिए बहुत जरूरी और कमाल का होता है. इससे साफ़ पता चलता है कि मुसलमान सबसे ज़्यादा फ़िल्में देखते हैं.” इसलिए फ़िल्म देखने वाले हर मुसलमान के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी होना चाहिए, और इससे हमारा काम वैसे भी रुक जाएगा.” इस्लाम की शिक्षाओं पर ज़ोर देते हुए, लेखक ने साफ़ कहा कि इस्लाम बदले की नहीं, बल्कि इंसानियत और प्यार की बात करता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि सलीम ख़ान और सलमान ख़ान ने हमेशा कहा है कि उनके घर में हर धर्म का सम्मान किया जाता है. सलमान की माँ हिंदू समुदाय से हैं. वो हर साल अपने घर पर गणेश चतुर्थी मनाते हैं और बप्पा की विदाई के दौरान ढोल की थाप पर नाचते भी हैं.
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