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Pakistan Kapoor property:  सरहद पार कपूर खानदान की प्रॉपर्टी जर्जर, पेशावर में पुश्तैनी हवेली पर मंडराया संकट

Pakistan Kapoor family property:  पेशावर में स्थित राज कपूर की पुश्तैनी हवेली का एक हिस्सा बारिश और भूकंप के कारण ढह गया है. यह इमारत भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है. प्रशासन ने इसके संरक्षण के लिए जल्द कदम उठाने की अपील की है.

By: Ranjana Sharma | Published: April 6, 2026 8:14:49 PM IST



Pakistan Kapoor family property: भारतीय सिनेमा के इतिहास से जुड़ी एक अहम धरोहर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. राज कपूर के परिवार की पेशावर स्थित पुश्तैनी हवेली का एक हिस्सा ढह गया है. बारिश और भूकंप के झटकों ने पहले से जर्जर इस इमारत को और कमजोर कर दिया है, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

बारिश और भूकंप ने बढ़ाया नुकसान

पेशावर में स्थित यह करीब 100 साल पुरानी हवेली लंबे समय से खराब हालत में थी. लगातार हो रही भारी बारिश ने इसकी दीवारों को कमजोर कर दिया, वहीं हाल ही में आए भूकंप के झटकों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया. बताया जा रहा है कि इन्हीं कारणों से हवेली का एक हिस्सा अचानक ढह गया.

प्रशासन ने जताई चिंता, संरक्षण की मांग

खैबर पख्तूनख्वा हेरिटेज काउंसिल के अधिकारियों ने इस घटना के बाद चिंता जताई है. उनका कहना है कि हवेली के बाकी हिस्सों पर भी खतरा बना हुआ है और अगर जल्द मरम्मत नहीं की गई तो और नुकसान हो सकता है. प्रशासन ने पुरातत्व विभाग और सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि इस ऐतिहासिक इमारत को बचाया जा सके.

कपूर खानदान का ऐतिहासिक घर

यह हवेली कपूर परिवार की पुश्तैनी संपत्ति रही है, जिसे दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच बनवाया था. इसी घर से पृथ्वी राज कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी. यहीं राज कपूर और त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था. बताया जाता है कि इस हवेली में करीब 40 कमरे हैं, जो उस दौर की समृद्ध वास्तुकला को दर्शाते हैं. 1947 के विभाजन के बाद कपूर परिवार Mumbai आकर बस गया और यह हवेली धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होती गई. 1990 के दशक में ऋषि कपूर और रणधीर कपूर यहां आए थे, लेकिन इसके बाद संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए.

धरोहर से म्यूजियम तक की अधूरी योजना

पाकिस्तान  सरकार ने 2016 में इस हवेली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था और इसे म्यूजियम में बदलने की योजना बनाई गई थी. हालांकि, अब इसका एक हिस्सा गिरने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि संरक्षण और पुनर्निर्माण का काम कब शुरू होगा.

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