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Dhurandhar song singer: सलमान खान से मिलने का सपना अधूरा रह गया, सिंगर की मां की आखिरी ख्वाहिश नहीं हुई पूरी

Dhurandhar song singer: ‘धुरंधर द रिवेंज’ के गाने से मशहूर हुए खान साहब ने अपनी सफलता के पीछे छिपे निजी दर्द को साझा किया और बताया कि उनकी मां का सलमान खान से मिलने का सपना अधूरा रह गया.

By: Ranjana Sharma | Published: April 10, 2026 5:46:19 PM IST



Dhurandhar song singer: कभी-कभी एक गाना सिर्फ मनोरंजन नहीं होता, बल्कि किसी की पूरी जिंदगी बदल देता है. ‘धुरंधर द रिवेंज’ का एक गाना इन दिनों कुछ ऐसा ही असर छोड़ रहा है. इस गाने ने जहां दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई, वहीं इसके गायक खान साहब को भी नई पहचान दिलाई.

कव्वाली के रीमेक ने मचाया धमाल

फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ का चर्चित गाना दरअसल मशहूर सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान की एक लोकप्रिय कव्वाली का रीमेक है. हालांकि इसे नए अंदाज में पेश किया गया, लेकिन इसमें मौजूद दर्द और सच्चाई ने इसे अलग पहचान दिलाई. पंजाबी सूफी सिंगर खान साहब की आवाज ने इस गाने को खास बना दिया. उनकी गायकी में मौजूद भावनाओं ने दर्शकों को गहराई से जोड़ लिया और देखते ही देखते वह एक नए उभरते सितारे बन गए.

सफलता के पीछे छिपा निजी दर्द

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान खान साहब ने अपनी इस सफलता के पीछे छिपी निजी जिंदगी की दर्दभरी कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर 2’ के म्यूजिक लॉन्च के बाद वह सीधे अपने माता-पिता की कब्र पर गए थे. वहां पहुंचकर वह अपनी मां को याद करते हुए बेहद भावुक हो गए और उनकी एक अधूरी ख्वाहिश का जिक्र किया.

मां का अधूरा सपना: सलमान खान से मिलने की ख्वाहिश

खान साहब ने बताया कि उनकी मां बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की बहुत बड़ी फैन थीं. उनका सपना था कि वह एक बार सलमान खान से मिलें. सिंगर ने कहा अम्मी मुझसे हमेशा कहती थीं कि उन्हें सलमान खान से मिलवा दूं. लेकिन उस समय मेरा इंडस्ट्री में कोई नाम नहीं था. मैं खुद उनसे नहीं मिल पाया, तो अम्मी को कैसे मिलवाता? उन्होंने यह भी कहा कि आज जब उन्हें पहचान मिल रही है, तब उनकी मां इस दुनिया में नहीं हैं, और यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया.

2025: सबसे मुश्किल साल

खान साहब के लिए साल 2025 बेहद कठिन रहा. सितंबर 2025 में उन्होंने अपनी मां को खो दिया, उस समय वह कनाडा में एक शो के सिलसिले में गए हुए थे. मां के निधन का दुख अभी संभल भी नहीं पाया था कि करीब 17 दिन बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया. इतने कम समय में दोनों को खो देना उनके लिए बहुत बड़ा सदमा था. इतने बड़े दुख के बावजूद खान साहब ने खुद को टूटने नहीं दिया. उन्होंने अपने संगीत और काम को ही सहारा बनाया और धीरे-धीरे खुद को संभालने की कोशिश की. उनकी आवाज में जो दर्द सुनाई देता है, वह उनकी जिंदगी के इसी संघर्ष और अनुभव का नतीजा है, जिसने उनके गाने को और भी खास बना दिया.

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