Bold on Screen: एक समय था जब हिंदी फिल्मों में भावनाएं इशारों में दिखाई जाती थीं. कैमरा अचानक घूम जाता था, गाना शुरू हो जाता था या बारिश सब कुछ कह जाती थी. खुले तौर पर कुछ दिखाना न समाज को मंजूर था, न सेंसर को. लेकिन जैसे-जैसे वक्त बदला, कुछ एक्ट्रेसेज सामने आईं जिन्होंने इस चुप्पी को तोड़ा. उन्होंने ऐसे किरदार चुने, जिनमें शरीर को छुपाने की चीज नहीं, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा माना गया. ये सफर आसान नहीं था, लेकिन इसी ने हिंदी सिनेमा की भाषा बदल दी.
जब बोल्ड सीन करना करियर के लिए खतरा माना जाता था, तब इन एक्ट्रेसेज ने जोखिम उठाया.
सिमी गरेवाल
1970 के दशक में, जब परदे पर नजदीक आना भी विवाद बन जाता था, सिमी गरेवाल ने एक विदेशी सहयोग से बनी फिल्म में साहसी दृश्य किया. उस समय इसका कड़ा विरोध हुआ, लेकिन इसी कदम ने आने वाली एक्ट्रेसेज के लिए रास्ता खोला.
जीनत अमान
जीनत अमान ने बोल्डनेस को कॉन्फिडेंस के साथ पेश किया. सफेद साड़ी में फिल्माया गया उनका दृश्य आज भी सिनेमा के इतिहास में याद किया जाता है. उन्होंने साबित किया कि बोल्ड होना केवल दिखावा नहीं, बल्कि इमोशनल एक्सप्रेशन भी हो सकता है.
मंदाकिनी
1980 के दशक में झरने के पास फिल्माया गया एक दृश्य खूब चर्चा में रहा . ये दृश्य इशारों और खुलेपन के बीच की सीमा पर था और उस दौर की सोच को खुली चुनौती देता था.
मल्लिका शेरावत
2000 के बाद मल्लिका शेरावत ने साफ कहा कि वे अपने चुनावों की जिम्मेदारी खुद लेती हैं. उनके लिए बोल्ड सीन सनसनी नहीं, बल्कि किरदार की मांग थे.
वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बदला नजरिया
वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से काम करने का तरीका बदला. अब कई प्रोजेक्ट्स में पहले से साफ शर्तें तय होती हैं. नई एक्ट्रेसेज इसे अपनी छवि तोड़ने और अलग किरदार निभाने का मौका मानती हैं.
राधिका आप्टे
राधिका आप्टे के कुछ दृश्य बिना किसी बनावटी चमक के थे. उनका मकसद उत्तेजना नहीं, बल्कि स्त्री की इच्छाओं, असहजताओं और समाज की सच्चाई को दिखाना था.
सीमा रहमानी
एक फिल्म में सीमा रहमानी ने अपने किरदार के लिए साहसी दृश्य किए. उनका साफ कहना था उनके लिए किरदार मायने रखता है, समाज की राय नहीं.

