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भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध 4.5 लाख के पार, NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4 लाख 48 हजार 211 मामले दर्ज किए गए, यह दिखाता है कि प्रति 1 लाख महिलाओं पर अपराध की राष्ट्रीय दर (National Crime Rate) 66.2 है.

Published by DARSHNA DEEP

National Crime Rate:  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक,  भारत में साल 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4 लाख 48 हजार 211 मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले दो सालों यानी 2022 और 2021 की तुलना में मामूली रूप से भी काफी ज्यादा है. यह रिपोर्ट दिखाती है कि प्रति 1 लाख महिलाओं पर अपराध की राष्ट्रीय दर 66.2 है. तो वहीं, दूसरी तरफ रिपोर्ट के मुताबिक, बलात्कार के 29 हजार 670 मामले (दर 4.4%) और महिलाओं पर शील भंग करने के इरादे से हमले के 83 हजार 891 मामले दर्ज किए गए हैं. 

राज्यवार आंकड़े और अपराध की प्रवृत्ति:

महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में हैं. इस राज्य में 66 हजार 381 मामले दर्ज किए गए हैं. उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सबसे आखिरी स्थान पर है. तो वहीं, बलात्कार के मामलों के बारे में बात करें तो महाराष्ट्र  में 3 हजार 970, मध्य प्रदेश में 3 हजार 619, तमिलनाडु में 2 हजार 999, बिहार में 1 हजार 818 और सबसे आखिरी में देश की राजधानी दिल्ली में 2 हजार 278 स्थान पर है. 

UPA बनाम NDA:एक तुलना:

आंकड़ों के विश्लेषण से एक बात ज़रूर साफ है कि UPA (2004-2014) के शासनकाल में बलात्कार के मामलों में 128 प्रतिशत की तेजी से बढ़ोतरी हुई है. जहां, साल 2004 में 16 हजार 075 मुकदमे दर्ज हुए थे, तो वहीं, दूसरी तरफ साल 2014 तक यह संख्या बढ़कर 36 हजार 735 हो गई है. NDA की सरकार आने के बाद भी साल 2014 में यह आंकड़ा 36 हजार 735 स्थान पर था. 

महिला सुरक्षा के लिए सरकार की पहल:

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 इस नियम के तहत बलात्कार की सजा को सख्त किया गया है. 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के बलात्कार के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है. सामूहिक बलात्कार में न्यूनतम सज़ा 20 साल से आजीवन कारावास की गई

निर्भया फंड के नियम के तहत 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा आवंटित किए गए है. वन स्टॉप सेंटर्स (सखी) की शुरुआत हुई, जो पीड़ितों को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं. महिला हेल्पलाइन 181 की भी शुरुआत की गई है. फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) की शुरुआत साल 2019 में की गई थी. इन 700 से अधिक अदालतों में बलात्कार और POCSO मामलों की सुनवाई 90 दिनों में पूरी करने का एक लक्ष्य रखा गया है.

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