Bihar Chunav 2025 में किन मुद्दों पर जनता डालेगी वोट? ओपिनियन पोल में आया सामने, जानिए

Bihar Assembly Election 2025: नौ प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को, दो प्रतिशत ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को, आठ प्रतिशत ने शिक्षा व्यवस्था को और चार प्रतिशत ने किसानों से जुड़े मुद्दों को चुनावी मुद्दा माना. इसके अलावा, एक प्रतिशत ने बाढ़, चार प्रतिशत ने पलायन, दो प्रतिशत ने राज्य के विकास और तीन प्रतिशत ने शराबबंदी को चुनावी मुद्दा माना.

Published by Ashish Rai

Bihar Chunav 2025: चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का एलान कर दिया है. चुनाव आयोग के एलान के अनुसार, बिहार में दो चरणों में मतदान होंगे. पहले चरण में 6 नवंबर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होंगी. वहीँ, नतीजों का एलान 14 नवंबर को होगा. 

चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही, आईएएनएस-मैट्रिज़ का एक सर्वेक्षण भी जारी किया गया है. सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में एनडीए गठबंधन एक बार फिर सरकार बनाने की ओर अग्रसर है. एनडीए को 243 में से 150-160 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एनडीए गठबंधन को 70 से 85 सीटें मिलने का अनुमान है.

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बिहार चुनाव में जनता किन मुद्दों पर वोट करेगी?

सर्वेक्षण में बिहार के लोगों से कई मुद्दों पर राय मांगी गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मतदाता इस विधानसभा चुनाव में किन मुद्दों पर मतदान करेंगे. जनता की राय के अनुसार, इस बार बिहार चुनाव में मतदान के लिए बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा माना जा रहा है.

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24 प्रतिशत लोगों ने बेरोजगारी, 10 प्रतिशत ने भ्रष्टाचार और 2 प्रतिशत ने बुनियादी सुविधाओं को मतदान के प्रमुख मुद्दे बताया. इसके अलावा, कानून-व्यवस्था (5 प्रतिशत) और बढ़ती कीमतें/मुद्रास्फीति (7 प्रतिशत) को भी चुनावी मुद्दों के रूप में प्राथमिकता दी गई.

प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा, बेरोज़गारी, महंगाई, या…

नौ प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को, दो प्रतिशत ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को, आठ प्रतिशत ने शिक्षा व्यवस्था को और चार प्रतिशत ने किसानों से जुड़े मुद्दों को चुनावी मुद्दा माना. इसके अलावा, एक प्रतिशत ने बाढ़, चार प्रतिशत ने पलायन, दो प्रतिशत ने राज्य के विकास और तीन प्रतिशत ने शराबबंदी को चुनावी मुद्दा माना.

पंद्रह प्रतिशत लोगों ने इनमें से किसी को भी चुनावी मुद्दा नहीं माना. इसके अलावा, आईएएनएस-मैट्रिएज सर्वेक्षण में बिहार में की गई विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) के बारे में भी जनता से राय ली गई, जिसमें 54 प्रतिशत लोगों ने चुनाव आयोग के कदम की सराहना की, जबकि 17 प्रतिशत ने राज्य में एसआईआर को ज़रूरी माना. इसके अलावा, 13 प्रतिशत लोगों ने इसे चुनावी फ़ायदे का सौदा माना, जबकि 16 प्रतिशत लोग इससे सहमत नहीं थे.

डिस्क्लेमर: मैट्रिज़-आईएएनएस ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एक ओपिनियन पोल किया. यह सर्वे बिहार के लोगों से बातचीत पर आधारित था. इसके लिए बिहार की सभी 243 सीटों पर 46,862 लोगों से बातचीत की गई. यह सर्वेक्षण 18 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच किया गया था. ओपिनियन पोल के रिजल्ट्स में मार्जिन ऑफ़ एरर प्लस माइनस 3 प्रतिशत है. यह ओपिनियन पोल इनखबर द्वारा नहीं किया गया है.

Ashish Rai

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