फिल्मों में दिखाई गई कहानियों से बिहार की छवि पर पड़ा असर! क्या इस बार मतदाता लाए पाएंगे कोई बदलाव?

Bihar Crime News: बिहार पर बनी फिल्मों में वहां की छवि को अपराध ग्रस्त दिखाया गया है, जिनमें अपराधियों को प्रशासन के ऊपर दिखाया गया है.

Published by Shubahm Srivastava

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. पटना में मीडिया से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मैं बिहार के सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि जिस तरह हम अपने त्योहारों को हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाते हैं. उसी तरह लोकतांत्रिक चुनावों के इस महापर्व को भी उत्सव की तरह मनाएं. 

अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं और मतदान करें. उन्होंने मतदान की तारीखों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी लेकिन इतना जरूर कहा कि 22 नवंबर से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. हर बार की तरह इस बार भी बिहार में अपराध और सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. विपक्ष की तरफ से भी ये मुद्दा काफी तेजी से उठाया है. 

बिहार को लेकर लोगों की सोच

इसके अलावा देश भर में बिहार की छवि एक अपराध ग्रस्त राज्य के रूप में बनी हुई है. इसके पीछे का एक बड़ा कारण बिहार पर बनी फिल्में हैं, जिसमें कई ऐसी चीजें दिखाई गई हैं, जिससे लोगों के मन में बिहार को लेकर एक तस्वीर बन गई है, जिसमें अपराधी अपनी बाहुबल का इस्तेमाल कर राजनेता बन जाते हैं और फिर जनता को अनसुना कर देते हैं. 

उदाहरण के तौर पर आप बॉलीवुड स्टार अजय देवगन (Ajay Devgan) की फिल्म गंगाजल को ही देख लें. इस फिल्म में साफतौर पर दिखाया गया है कि कैसे बाहुबली अपनी ताकत के दम पर पुलिस प्रशासन को अपने नीचे दबाकर रखते हैं. और अपनी काली करतूत (अपराध) को अंजाम देते रहते हैं.

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सुरक्षा-व्यवस्था और भ्रष्टाचार बिहार सरकार के लिए बड़ी चुनौती

इस बार बिहार के दंगल में प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) भी अपनी जन सुराज पार्टी के साथ उतरे हुए हैं. चुनाव प्रचार की शुरूआत से ही प्रशांत किशोर सरकार और विपक्ष दोनों हमलावर हो रखे हैं. (29 सितंबर) को उनकी तरफ से की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी पार्टी और उनपर फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया. इसके अलावा बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को 6 हत्या का आरोपी बताया है. इसके अलावा उन्होंने सम्राट चौधरी को पद से हटाए जाने की भी मांग की है. अब नीतीश सरकार के लिए इन आरोपों से बच पाना और जनता को विश्वास दिलाना बड़ी चुनौती होने वाली है. 

बिहार के वोटर को लेना होगा फैसला?

पक्ष विपक्ष का एक दूसरे पर आरोप लगाना कोई नई बात नहीं है. चुनावों के वक्त ये चीजें एक अलग की स्तर पर चली जाती हैं. अब ये बता पाना की किसके आरोपों में दम है और कौन सिर्फ असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए आरोप लगा रहा है मुश्किल है. लेकिन बिहार के वोटर को इस बार सोच समझकर सारे मुद्दों पर ध्यान देकर मतदान करना होगा और फिल्मी दुनिया से बाहर आना होगा. इससे ही बिहार में एक भयमुक्त समाज बन सकेगा. 

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