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India-EU Trade Deal: VW, Mercedes, BMW की चमकेगी किस्मत, क्या भारत-EU डील से लग्जरी कारें होंगी सस्ती?

India EU Trade deal: विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के विशाल बाज़ार का सबसे महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि दोनों पक्ष एक संभावित मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका खुलासा मंगलवार को ही हो सकता है.

By: Shubahm Srivastava | Published: January 26, 2026 6:20:37 PM IST



India EU Trade Deal on Cars: भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड डील की उम्मीदों के बीच मंगलवार (27 जनवरी) के सेशन में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी जैसे भारतीय ऑटो स्टॉक फोकस में रहेंगे. स्टॉक मंगलवार को सुर्खियों में रहने की संभावना है, क्योंकि रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर टैरिफ 110% से घटाकर 40% करने की योजना बना रहा है, जैसा कि रविवार, 25 जनवरी को रॉयटर्स की न्यूज़ रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है.
 
विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के विशाल बाज़ार का सबसे महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि दोनों पक्ष एक संभावित मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका खुलासा मंगलवार को ही हो सकता है.
 
SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि, EU कारों पर आयात शुल्क कम करने का भारत का फैसला ऑटो सेक्टर में हलचल मचाने वाला है. Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसे यूरोपीय लग्जरी ब्रांड्स को फायदा होने की संभावना है, जिससे वे कारों को ज़्यादा प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेच पाएंगे.
 
स्थानीय डीलरशिप और सर्विस प्रोवाइडर्स को भी बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे घरेलू खिलाड़ियों को लग्जरी सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है.

चुनिंदा कारों पर टैक्स की होगी कमी!

इसके अलावा, रॉयटर्स ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने 27-सदस्यीय ब्लॉक से 15,000 यूरो ($17,739) से अधिक आयात मूल्य वाली चुनिंदा कारों पर टैक्स को तेज़ी से कम करने पर सहमति जताई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसे आखिरकार घटाकर 10% कर दिया जाएगा, जिससे Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाज़ार में प्रवेश करना आसान हो जाएगा.
 
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसे आखिरकार घटाकर 10% कर दिया जाएगा, जिससे Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाज़ार में प्रवेश करना आसान हो जाएगा.
 
इस स्थिति को देखते हुए, ITI ग्रोथ अपॉर्चुनिटीज़ फंड के CIO और मैनेजिंग पार्टनर मोहित गुलाटी ने बताया कि भारत में अन्य सभी लिस्टेड खिलाड़ियों (ऑटो स्टॉक) पर नकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि यह VW, Mercedes, BMW और Audi के पक्ष में माहौल बना रहा है.

ऑटो और ऑटो सहायक स्टॉक प्रभावित होने की संभावना 

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, इस कदम से भारतीय ऑटो बाज़ार के अधिक प्रतिस्पर्धी होने और उपभोक्ताओं को फायदा होने की उम्मीद है. यह भारत को एक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में भी स्थापित करता है, जिससे निवेश आकर्षित होगा और रोज़गार के अवसर पैदा होंगे. भारत में यूरोपीय लग्जरी EV की बिक्री को बढ़ावा मिलने की संभावना है. सीमा श्रीवास्तव बताती हैं कि जिन ऑटो स्टॉक्स पर पॉजिटिव असर पड़ने की उम्मीद है, उनमें फॉक्सवैगन इंडिया, मिडास कंपोनेंट्स और भारत फोर्ज शामिल हैं. इसके उलट, मारुति सुजुकी और अपोलो टायर्स पर लगभग कोई नेगेटिव असर होने की उम्मीद नहीं है. हालांकि, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा, खासकर लग्जरी सेगमेंट में, नेगेटिव रूप से प्रभावित हो सकते हैं.

कम इंपोर्ट टैक्स का भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए क्या मतलब है?

बिक्री के मामले में भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार मार्केट है, फिर भी इसका घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर बहुत ज़्यादा सुरक्षित रहा है. टैक्स कम होने से कार बनाने वाली कंपनियां इंपोर्टेड गाड़ियों को कम कीमतों पर बेच पाएंगी और ज़्यादा कारें लोकल लेवल पर बनाने का फैसला करने से पहले ज़्यादा ऑप्शन के साथ मार्केट को एक्सप्लोर कर पाएंगी.
 
कम इंपोर्ट ड्यूटी से फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट और स्टेलेंटिस जैसी यूरोपियन कार बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसे लग्जरी ब्रांड्स को भी फायदा होगा, जो पहले से ही भारत में कारें बनाती हैं, लेकिन ज़्यादा टैरिफ की वजह से उन्हें आगे बढ़ने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. रॉयटर्स ने कहा के मुताबिक  नई दिल्ली विदेश से लाई गई कारों पर 70% और 110% टैरिफ लगाती है.
 
शुरुआती पांच सालों के लिए, बैटरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को इंपोर्ट ड्यूटी में किसी भी कटौती से छूट दी जाएगी ताकि महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी लोकल कंपनियों द्वारा इस उभरते सेक्टर में किए गए इन्वेस्टमेंट की सुरक्षा की जा सके. रॉयटर्स ने अपने सूत्रों के हवाले से कहा कि इस पांच साल की अवधि के बाद, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी इसी तरह की ड्यूटी में कटौती का फायदा मिलेगा.

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