Azamgarh DIOS Office Suicide Attempt: यह घटना दिखाती है कि कैसे ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचार एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर ले आता है, पीड़ित का दावा है कि ₹25 लाख की मोटी रकम की मांग पूरी ना होने के कारण अधिकारियों ने व्यक्तिगत रंजिश पाल ली और जानबूझकर सैलरी फाइल को रोक दिया, यदि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सैलरी नहीं दी गई, तो यह सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है प्रशासनिक अधिकारियों का अदालत से ऊपर खुद को समझना लोकतंत्र के लिए खतरा है, सौरभ के आत्मघाती कदम के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई हालांकि, अब देखना यह होगा कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, महीनों तक सैलरी ना मिलने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है, जिससे परिवार के सदस्य अवसाद (Depression) और आत्महत्या जैसे विचारों की ओर धकेल दिए जाते हैं.
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