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NCERT syllabus Supreme Court comment: देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक संतुलित, आधुनिक और प्रभावी बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा है कि NCERT पाठ्यक्रम की समीक्षा केवल कक्षा 8 तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे सभी कक्षाओं तक विस्तारित किया जाना चाहिए. यह निर्देश शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
सभी कक्षाओं में समीक्षा की जरूरत
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाठ्यक्रम का दायरा सीमित नहीं होना चाहिए. उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बुनियादी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को समग्र रूप से विकसित करना है. ऐसे में हर कक्षा के पाठ्यक्रम की समीक्षा जरूरी है ताकि छात्रों को हर स्तर पर संतुलित और अद्यतन जानकारी मिल सके. कोर्ट ने विशेष रूप से पाठ्यक्रम में शामिल न्यायपालिका से जुड़े विषयों की समीक्षा पर जोर दिया. CJI के अनुसार, छात्रों को देश की न्याय व्यवस्था, संविधान और कानूनी प्रक्रियाओं की सही और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए. इससे उनमें न केवल जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि वे जिम्मेदार नागरिक भी बन सकेंगे. यह पहल छात्रों में संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों के प्रति समझ विकसित करने में सहायक हो सकती है.
तीन सदस्यीय समिति पहले से सक्रिय
केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए पहले ही एक तीन सदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है. इस समिति में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल और पूर्व पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह शामिल हैं. यह समिति विभिन्न विषयों का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधारों और बदलावों की सिफारिश करेगी, जिससे शिक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाया जा सके. इसी दिशा में NCERT ने भी एक अहम कदम उठाते हुए एमसी पंत की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है. इस समिति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यक्रम को अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बनाना है. साथ ही, शिक्षकों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे छात्रों को आधुनिक और व्यावहारिक ज्ञान दे सकें.
शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की उम्मीद
यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. व्यापक समीक्षा से पाठ्यक्रम को समय के अनुरूप अपडेट किया जा सकेगा और इसे अधिक संतुलित बनाया जा सकेगा. इससे छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए जरूरी समझ भी मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी शिक्षा सुधार की दिशा में एक मजबूत पहल है.