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दीपक पारीक की एक रील में एक युवक ने समाज की आंखें खोलने वाली आपबीती सुनाई, उसने पड़ोस में हुए हमले के शिकार व्यक्ति को बचाने के लिए बहादुरी दिखाई, लेकिन पुलिस ने उसकी मदद को अनदेखा कर उसे ही मुख्य आरोपी बना दिया, बिना किसी जुर्म के उसे 45 दिन जेल की कालकोठरी में बिताने पड़े, जहां उसने बेहद घटिया खाने और मानसिक दबाव का सामना किया, हैरान करने वाली बात यह रही कि जेल के भीतर ‘अपराधी’ कहे जाने वाले कैदियों ने उसकी सच्चाई समझी और उसे सहारा दिया, जबकि बाहर का ‘सिस्टम’ उसे दोषी साबित करने पर तुला था.