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क्या होता है सोशल मीडिया वॉरफेयर, क्या है इनके उपाय, जानें कैसे इससे निपटा जा सकता ?

Social Media Warfare: सोशल मीडिया युद्ध में पोस्ट और अफवाहें हथियार बन जाती हैं. इसका लक्ष्य लोगों की सोच बदलना है. इससे निपटने के लिए डिजिटल समझ, सही जानकारी और जिम्मेदारी जरूरी है.

By: sanskritij jaipuria | Last Updated: January 12, 2026 4:36:18 PM IST



Social Media Warfare: आज के समय में लड़ाइयां सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ी जातीं. मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जरिये भी टकराव हो रहा है. इसे ही कई लोग ‘सोशल मीडिया वॉर’ कहते हैं. इसमें बंदूक या बम की जगह खबरें, पोस्ट, वीडियो और अफवाहें हथियार बन जाती हैं. इसका मकसद लोगों की सोच, राय और व्यवहार को बदलना होता है.

1990 के दशक में दो शोधकर्ताओं, जॉन अर्क्विला और डेविड रॉनफेल्ट, ने एक नए तरह के स्ट्रगल की बात कही थी. उन्होंने इसे ‘नेटवार’ कहा. उनके अनुसार ये ऐसी लड़ाई होती है जिसमें छोटे ग्रुप या संगठन इंटरनेट और नेटवर्क का इस्तेमाल करके समाज पर असर डालते हैं. इसमें इमारतें या मशीनें नष्ट करना लक्ष्य नहीं होता, बल्कि लोगों की सोच को अपने पक्ष में मोड़ना असली उद्देश्य होता है. जानकारी और भ्रम यहां सबसे बड़ा हथियार बन जाते हैं.

आज की लड़ाइयां कैसे लड़ी जा रही हैं

भावनाओं से भरी कहानियां- सोशल मीडिया पर ऐसी बातें फैलाई जाती हैं जो गुस्सा, डर या नफरत पैदा करें. झूठी खबरें अक्सर सच से ज्यादा तेजी से फैलती हैं. इससे समाज में भ्रम और आपसी तनाव बढ़ता है.

आर्थिक और तकनीकी टकराव- अब देशों के बीच तनाव सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है. ऐप्स पर रोक लगाना, तकनीक के आयात पर पाबंदी या टैक्स लगाना भी टकराव का हिस्सा बन गया है. इससे बिना युद्ध के ही दबाव बनाया जाता है.

लोगों को सड़कों पर उतारना- सोशल मीडिया के जरिये विरोध, बहिष्कार या आंदोलन के लिए लोगों को बुलाया जाता है. कई बार ऐसा दिखाया जाता है जैसे बहुत बड़ी संख्या में लोग नाराज हैं, जबकि हकीकत अलग होती है.

राजनीति और बाजार पर असर- चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए डेटा और फर्जी अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जाता है. गलत जानकारी फैलाकर शेयर बाजार या कंपनियों की छवि को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है.

इससे निपटने के उपाय

डिजिटल समझ बढ़ाना- लोगों को ये सिखाना जरूरी है कि झूठी खबर कैसे पहचानें और किसी भी पोस्ट पर बिना सोचे भरोसा न करें.

 सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी- प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियों को साफ नियम बनाने चाहिए और संगठित झूठ फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए.

 सरकार की भूमिका- सरकारों को सूचना सुरक्षा से जुड़े मजबूत नियम और नीतियां बनानी होंगी, ताकि डिजिटल दुष्प्रचार को रोका जा सके.

 तथ्य और सही जानकारी- गलत बातों का जवाब सही तथ्यों से जल्दी देना ज.रूरी है। भरोसेमंद पत्रकारिता और प्रमाणित स्रोत लोगों का भरोसा वापस ला सकते हैं.

 देशों के बीच सहयोग- क्योंकि सोशल मीडिया की सीमाएं नहीं होतीं, इसलिए देशों को मिलकर नियम और समाधान तैयार करने होंगे.

रिपोर्ट करें- किसी भी गलत बातों को तुरंत रिपोर्ट करें और ऐसे अकाउंट को झट से ब्लॉक करें.

तय करें सीमाएं- उस टाइम को सीमित करें जो सोशल मीडिया पर बिताए जा रहे हैं और किसी भी तरह के अननोन एड्स पर क्लिक करने से बचें.

सोशल मीडिया युद्ध दिखने में शांत लगता है, लेकिन इसका असर गहरा होता है. ये लोगों की सोच और समाज की दिशा बदल सकता है. इसलिए समझदारी, जागरूकता और सही जानकारी ही इसका सबसे बड़ा बचाव है.
 

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