Shreyansh Sharma Commissioned as Sub Lieutenant: सब लेफ्टिनेंट श्रेयांश शर्मा की कहानी आज हर के युवा को प्रेरणा दे रही है, खासकर उन युवाओं को जो भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) में शामिल होने का सपना देख रहे हैं. 10वीं कक्षा में बेहतरीन अंकों से लेकर एनडीए में 503वीं रैंक हासिल करना सुनने में जितना आसान लगता है लेकिन कही ज्यादा मुश्किल है.
कैसे थी श्रेयांश शर्मा की स्कूली शिक्षा?
दरअसल, उन्होंने स्कूल के दिनों में ही भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखा था. बस फिर क्या अपने सपनों को उड़ान देने के लिए उन्होंने दिन-रात एक करने की तैयारी शुरू कर दी. जब उन्होंने 10वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किया तब से ही उन्हें खुद पर भरोसा होने लगया था. लेकिन, श्रेयांश का लक्ष्य सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं था, उन्होंने अपने दिल और दिमाग में यह ठान लिया था कि उन्हें आगे देश के लिए ही सेवा करना है.
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में 503 रैंक किया हासिल
अपनी स्कूल की शिक्षा खत्म करने के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, NDA (National Defence Academy) की तैयारी की शुरुआत की. अपनी लगन के दम पर उन्होंने न सिर्फ परीक्षा को पास किया, बल्कि अखिल भारतीय स्तर पर 503वीं रैंक हासिल कर अपने माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. इसके साथ ही खडकवासला स्थित एनडीए में तीन साल के कठोर प्रशिक्षण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से एक योद्धा के रूप में ढालने का काम किया.
श्रेयांश शर्मा को कैसे मिला सब लेफ्टिनेंट का पद?
इसके बाद, श्रेयांश ने नौसेना के मुश्किल प्रशिक्षण के लिए और भी ज्यादा मेहनत करनी शुरू कर दी. उनके समर्पण का फल तब मिला जब पासिंग आउट परेड के दौरान उन्हें भारतीय नौसेना (Indian Navy) में सब लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला. यह क्षण उनके परिवार और क्षेत्र के लिए बेहद ही गर्व का था. तो वहीं, श्रेयांश शर्मा की यह यात्रा साबित करती है कि अगर आपके इरादे और लक्ष्य दोनों ही मजबूत हैं, तो कोई कितनी भी बाधा क्यों न हो आप उन्हें एक दिन बेहद ही आसानी से हराकर अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं.