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Pakistan Spy: आतंकवादी नहीं बन सकते वो जिन्हे नहीं आता ये काम? खुद जैश-ए-मोहम्मद ने दिया जिहादियों को फरमान

Pakistani Terrorist: पाकिस्तान न पहले कभी अपने नापाक इरादों से बाज आया है और न ही अब, लगातार भारत में पड़के जा रहे आतंकवादी इस बात का सबूत हैं साथ ही भारत पर हो रहे हमले भी.

Published by Heena Khan

Pakistani Terrorist: पाकिस्तान न पहले कभी अपने नापाक इरादों से बाज आया है और न ही अब, लगातार भारत में पड़के जा रहे आतंकवादी इस बात का सबूत हैं साथ ही भारत पर हो रहे हमले भी. इस बीच  पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और फरातुल्लाह गौरी ग्रुप से जुड़े छह संदिग्धों की गिरफ्तारी की जांच आगे बढ़ रही है, कई सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं. वहीं जानकारी के मुताबिक, मामले की जांच कर रही टीम ने मुख्य आरोपी शावेज उर्फ ‘जिहादी’ के मोबाइल फोन से एक अहम संदेश बरामद किया है.

स्मार्ट फोन नहीं आता चलाना तो…

बता दें कि इस संदेश में, उसने पाकिस्तान में बैठे जैश के एक हैंडलर को सात लोगों की एक सूची भेजी थी. उनके नामों के साथ-साथ, इस सूची में उनकी शैक्षणिक योग्यता, पेशे और स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की उनकी दक्षता का भी विस्तृत विवरण दिया गया था. बता दें कि इस सूची में पश्चिम बंगाल का एक व्यक्ति और बांग्लादेश का एक और व्यक्ति भी शामिल था. वहीं इसके जवाब में, जैश की ओर से निर्देश मिले कि कम पढ़े-लिखे लोगों को भी नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है; लेकिन, जो लोग स्मार्टफोन चलाना नहीं जानते थे, उन्हें सूची से बाहर रखा जाना था. इसके अलावा, समूह को निर्देश दिया गया कि वह सूची को छोटा करे और इसे केवल तीन लोगों तक सीमित रखे.

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क्या है जिहादियों का मकसद?

इतना ही नहीं, इस दौरान जांच एजेंसियों ने मामले को देखने का अपना नजरिया बदल दिया है. पेशे से वकील इकराम अली को नेटवर्क में भर्ती करने के पीछे ‘जिहादी’ का मकसद कानूनी पेचीदगियों से निपटने में उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना था. साथ ही, जुनैद का LLB प्रोग्राम में दाखिला करवाकर, समूह का उद्देश्य कानूनी सूझबूझ रखने वाले पढ़े-लिखे लोगों का एक नेटवर्क तैयार करना था. वहीं पूछताछ के दौरान, ‘जिहादी’ ने जांच एजेंसियों को इस बात की भी जानकारी दी है कि गिरोह अपनी अधिकांश बातचीत कोड शब्दों का उपयोग करके करता था. ऐसे भी मौके आए जब इन कोड को समझना मुश्किल साबित हुआ; ऐसी स्थितियों में, वो इकराम की मदद लेता था. संदेशों के सभी आदान-प्रदान के लिए कोड शब्दों का उपयोग करना पूरी तरह से अनिवार्य था.

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