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Flash Eating Bacteria: कोरोना के बाद इस बीमारी ने US में मचाया कोहराम, पानी में बना रहा लोगों को अपना शिकार…क्या भारत पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा?

US Flash Eating Bacteria: यह बैक्टीरिया वास्तव में मांस नहीं खाता, बल्कि ऊतकों को नष्ट कर देता है। यह त्वचा में छेद करके अपने आप प्रवेश नहीं करता, बल्कि अगर त्वचा में कोई कट लग जाए या पानी के ज़रिए मुँह में चला जाए, तो संक्रमण हो जाता है।

Published by Shubahm Srivastava

US Flash Eating Bacteria: कोरोना वायरल ने पूरी दुनिया में जमकर तबाही मचाई थी। अमेरिका से लेकर भारत तक हर देश में इस वायरस ने लाखों करोड़ों को अपना शिकार बनाया था। हाल ये हो रखा था कि एक समय पर इस बिमारी से बचने के लिए दुनिया थम गई थी। कई देशों में लॉकडाउन तक लगाना पड़ा था। लेकिन अब इसी कड़ी में एक बैक्टीरिया सामने निकल कर आया है, जो इंसानी मास खाता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, यह बैक्टीरिया उच्च तापमान में तेज़ी से फैलता है और लोगों को अपना शिकार बनाता है। अब इस जानलेवा बैक्टीरिया ने अमेरिका में लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी है। यह बैक्टीरिया गर्मियों में समुद्र में नहा रहे कुछ लोगों में प्रवेश कर जाता है और मांस खाने लगता है। 2025 में फ्लोरिडा में इस दुर्लभ मांसभक्षी बैक्टीरिया के कारण चार लोगों की मौत हो गई थी। ये मौतें अब तक सामने आए बैक्टीरियल इन्फेक्शन के 11 मामलों में शामिल हैं।

आखिर क्या है ये बैक्टीरिया?

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैक्टीरिया का नाम Vibrio Vulnificus है। यह एक दुर्लभ बैक्टीरिया है। आमतौर पर गर्म जलवायु में, यह समुद्र के खारे पानी में फैलता है और नहाने गए कुछ लोगों के शरीर में यह बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है। 2016 से अब तक फ्लोरिडा में इस बैक्टीरिया से संक्रमण के 448 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 100 लोगों की मौत भी हो चुकी है। 

इस तरह यह बैक्टीरिया बेहद जानलेवा है। इसलिए लोगों को डर है कि यह दूसरे देशों में भी फैल सकता है। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, यह बैक्टीरिया गर्म और खारे समुद्री पानी में पाया जाता है।

Vibrio Vulnificus के बारे में सारी जानकारी –

रिपोर्टों के अनुसार, यह बैक्टीरिया वास्तव में मांस नहीं खाता, बल्कि ऊतकों को नष्ट कर देता है। यह त्वचा में छेद करके अपने आप प्रवेश नहीं करता, बल्कि अगर त्वचा में कोई कट लग जाए या पानी के ज़रिए मुँह में चला जाए, तो संक्रमण हो जाता है।

रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, यह बैक्टीरिया गर्मी के मौसम में, खासकर मई से अक्टूबर के बीच, बड़ी मात्रा में पाया जाता है, क्योंकि उस समय पानी का तापमान ज़्यादा होता है।

विब्रियो वल्निकस खारे समुद्रों में पाया जाता है और जब लोग नहाने जाते हैं, तब शरीर में प्रवेश करता है। हालाँकि, विब्रियो वल्निकस का संक्रमण बहुत दुर्लभ है। सीडीसी के अनुसार, अमेरिका में हर साल लगभग 80,000 विब्रियो संक्रमण और इससे संबंधित 100 मौतें होती हैं।

यह संक्रमण आमतौर पर उन लोगों में ज़्यादा होता है जो संक्रमित कच्चे या अधपके समुद्री भोजन का सेवन करते हैं। इसके अलावा, अगर किसी के शरीर में घाव हो, तो भी संक्रमण का खतरा ज़्यादा होता है। इसके अलावा, अगर कोई इस नमकीन पानी को मुँह में ले लेता है, तो भी यह बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है।

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इन लोगों को है इस बैक्टीरिया से खतरा

यह बैक्टीरिया उन लोगों के लिए ज़्यादा ख़तरनाक है जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर है या जिन्हें कोई पुरानी बीमारी है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के संक्रमण रोग विशेषज्ञ डॉ. एडवर्ड हिर्श कहते हैं कि यह उन लोगों के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक है जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर है जैसे सिरोसिस के मरीज़, कीमोथेरेपी ले रहे लोग या किसी और वजह से कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोग।

इसके लक्षणों की बात करें तो इससे दस्त, पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी और बुखार हो सकता है। अगर संक्रमण किसी खुले घाव से हुआ है, तो त्वचा का रंग बदल सकता है, सूजन आ सकती है, त्वचा क्षतिग्रस्त हो सकती है और अल्सर भी हो सकता है। डॉ. हिर्श के अनुसार, जिस हिस्से में संक्रमण होता है, वहाँ यह छेद कर देता है।

यह बैक्टीरिया कितना खतरनाक है, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि विब्रियो वुल्निफिकस के कारण आप नेक्रोटाइज़िंग फ़ेसिटिस नामक गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं। इससे संक्रमित हिस्से की त्वचा मर सकती है। अगर बीमारी खतरनाक हो जाए, तो ऐसे मामलों में बड़ी सर्जरी या अंग काटने तक की ज़रूरत पड़ सकती है।

ऐेसे करें बचाव

इस बैक्टीरिया के संक्रमण से बचने के लिए, समुद्र में जाते समय विशेष सावधानी बरतें। समुद्र में तैरने के बाद खुद को अच्छी तरह धोएँ और समुद्री भोजन को अच्छी तरह धोकर पकाएँ, क्योंकि ये दो सबसे आम स्रोत हैं। इसके बाद, अगर शरीर पर कोई घाव या कट लग जाए, तो नमकीन या खारे पानी में न जाएँ।

अगर पानी में घाव हो जाए, तो तुरंत पानी से बाहर निकल जाएँ। अगर संक्रमित पानी या समुद्री भोजन के संपर्क में आए हैं, तो घाव को वाटरप्रूफ पट्टी से ढक दें। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कच्चे और पके हुए समुद्री भोजन को एक साथ न रखें। अगर घाव संक्रमित हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

क्या भारत पर भी मंडरा रहा खतरा?

यह बैक्टीरिया समुद्र के खारे पानी में रहता है, इसलिए यह समुद्र में नहाने वालों को संक्रमित करता है। लेकिन यह बैक्टीरिया आमतौर पर मेक्सिको की खाड़ी में पाया जाता है। इसलिए, यह अमेरिका, मेक्सिको और कुछ उत्तरी अमेरिकी देशों में पाया जाता है। बैक्टीरिया की यह प्रजाति अन्य समुद्रों में नहीं पाई गई है। इसलिए, इसके भारत आने का खतरा नगण्य है।

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