Lucknow Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दहशत में डाल देने वाला मामला सामने आ रहा है. दरअसल, यहां मड़ियाओं पुलिस थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, इस घटना ने फिर से एक बार लोगों को शर्मसार कर दिया है. बता दें कि गोमती नदी के किनारे संदिग्ध परिस्थितियों में 17 साल की नाबालिग लड़की का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. वहीं इस मामले की शिकायत पहुँचते ही पुलिस ने बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और लड़की के शव को कब्जे में ले लिया है. इस मामले के बाद मृत लड़की के मौसा को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया है.
पीठ दर्द का बहाना और अपहरण का झूठ
जानकारी के मुताबिक, लड़की बुधवार रात अपने मामा के साथ घर से निकली थी. बताया जा रहा है कि मौसा ने पीठ के निचले हिस्से में दर्द का बहाना बनाकर उससे कहा कि उन्हें दवा खरीदने के लिए बाहर जाना है, जिसके बाद वो अपनी भांजी को भी अपने साथ ले गया. वहीं फिर आधे घंटे बाद उसने लड़की के भाई को फोन किया और दावा किया कि कुछ लोगों ने उसकी बहन को जबरदस्ती एक कार में डाल दिया है और उसे लेकर भाग रहे हैं; इतना ही नहीं इस दौरान उसने ये भी कहा कि मैं उनका पीछा कर रहा हूँ.
इस हालत में मिली लड़की की लाश
इस जानकारी के बाद मौके पर ही हड़कंप मच गया. जिसके बाद रिश्तेदार तुरंत उस जगह पहुंचे जिसका ज़िक्र मौसा ने किया था, यहां उन्हें मौसा गाँव के ठीक बाहर बेहोश पड़ा मिला. थोड़ी ही दूरी पर, गोमती नदी के किनारे, लड़की के कपड़े और अंतर्वस्त्र ज़मीन पर पड़े मिले. घर की लड़की को इस हालत में देख परिवार वालों के होश उड़ गए और उन्होंने इस बात की जानकारी पुलिसवालों को दी.
नदी से नग्न अवस्था में मिली लड़की
जैसा ही इस बात की सूचना पुलिस को मिली वैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची और SDRF की मदद से नदी में तलाशी अभियान शुरू किया. तलाशी देर रात तक जारी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. गुरुवार सुबह, पिपरिया पुल के पास नदी से लड़की का शव बरामद किया गया. शव मिलने से परिवार गहरे सदमे और अफरा-तफरी में डूब गया.
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कौन है असली गुनाहगार
जानकारी के मुताबिक पुलिस जांच में पता चला की मौसा के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए. उसने शुरू में दावा किया था कि वो लड़की को एक ऑटो-रिक्शा में ले जा रहा था; हालाँकि, उस इलाके के CCTV फुटेज में उसे एक मोटरसाइकिल पर उसे ले जाते हुए साफ़ देखा जा सकता था. फुटेज में किसी भी चार-पहिया वाहन का कोई सबूत नहीं मिला, जिससे अपहरण से जुड़ी पूरी कहानी बेहद संदिग्ध हो गई.

