कानपुर में नकली और नशीली दवाओं का बड़ा खुलासा: लाखों की दवाएं बरामद

उत्तर प्रदेश के कानपुर में ड्रग विभाग (Drug Department) और नारकोटिक्स टीम (NCB) की संयुक्त कार्रवाई में नकली (Fake) और नशीली दवाओं (Drugs) के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश (Exposed) हुआ है. श्री लक्ष्मी फार्मा नामक फर्म से पांच लाख रुपये की नकली दवाएं और 29 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. जांच में पाया गया कि फर्म में दवाओं की एक्सपायरी डेट (Expiry Date) बदलकर नई पैकिंग (New Packing) और लेबलिंग (Labelling) की जा रही थी.

Published by DARSHNA DEEP

Fake Medicine Supply in Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर में नकली और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जहां, मंगलवार को ड्रग विभाग, पंजाब के नारकोटिक्स विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने बिरहाना रोड स्थित दवा फर्म श्री लक्ष्मी फार्मा पर छापेमावरी कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. यह कार्रवाई ड्रग विभाग के इंस्पेक्टर ओमपाल और रेखा सचान के नेतृत्व में की गई, जिसमें लुधियाना एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और कानपुर पुलिस भी शामिल रही.

ड्रग विभाग की छापेमारी से मचा हड़कंप:

ड्रग विभाग टीम ने कार्रवाई के दौरान लगभग पांच लाख रुपये की नकली दवाएं और 29 लाख रुपये के नकदी को बरामद करने में सफलता हासिल की है. इसके अलावा मौके पर एक मिनी पोर्टेबल प्रिंटर, खाली दवा बॉक्स, और लेबल भी जब्त किए. जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि फर्म में दवाओं की एक्सपायरी डेट मिटाकर नई तारीख की जा रही थी. 

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टीम ने कार्रवाई के दौरान क्या किया बरामद:

छापेमारी की कार्रवाई सुबह शुरू हो गई थी और चार घंटे से ज्यादा समय तक चली. फर्म का मालिक राहुल अग्रवाल भी कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद था, जिसने नशीली दवाओं की बिक्री से पूरी तरह से साफ इनकार कर  दिया था. लेकिन, उसकी तीसरी मंजिल पर स्थित आवास से गैस, पेट दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक इंजेक्शन समेत छह तरह की नकली दवाएं बरामद हुईं. हालांकि, शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये सभी दवाएं घर में ही तैयार की जा रही थीं. 

छापेमारी के बाद अधिकारियों ने दी जानकारी:

ड्रग विभाग ने सभी बरामद दवाओं को बरामद कर उन्हें सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं. कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि फर्म के मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, फर्म का निदेशक छापेमारी के दौरान फरार हो गया था, जिसकी पुलिस तलाश करने में लगातार जुटी हुई है.  फिलहाल, अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दवाओं की री-लेबलिंग और नकली पैकिंग से जुड़ा है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह से खतरा बना हुआ है. जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में भी जुटी हैं.

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