माँ ने गहने बेचकर दिलाया था बैट, आज उसी बेटे ने रच दिया विश्व रिकॉर्ड; आपको भी रुला देगी इस बिहारी बेटे की कहानी!

जिस बेटे के लिए माँ ने अपने गहने गिरवी रख दिए, आज उसी ने मैदान पर वो कर दिखाया जिसने पूरे देश को चौंका दिया. जानिए साकिबुल गनी के उस संघर्ष और ऐतिहासिक रिकॉर्ड की पूरी कहानी जिसने ईशान किशन को भी पीछे छोड़ दिया...

Published by Shivani Singh

 Fastest century in Vijay Hazare Trophy: साकिबुल गनी की कहानी महज़ क्रिकेट के रिकॉर्ड्स की नहीं, बल्कि एक माँ के त्याग और एक बेटे के अटूट संकल्प की गाथा है. कभी एक बैट खरीदने के लिए जिनकी माँ ने अपने गहने तक बेच दिए थे, आज उसी साकिबुल ने विजय हजारे ट्रॉफी के इतिहास में सबसे तेज़ शतक जड़कर भारतीय क्रिकेट में खलबली मचा दी है. बुधवार को मैदान पर गनी की पारी ने न केवल रिकॉर्ड बुक को बदला, बल्कि उस संघर्ष को भी फिर से सुर्खियों में ला दिया जिसने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया है.

विश्वास और बलिदान की नींव

साकिबुल के लिए सफलता का यह रास्ता काँटों भरा रहा है. एक दौर था जब उनके परिवार के लिए बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना भी एक चुनौती थी, क्रिकेट किट तो बहुत दूर की बात थी. ऐसे कठिन समय में उनकी माँ ने अपने गहने गिरवी रखे ताकि उनके बेटे के सपनों को नई उड़ान मिल सके.

उनके भाई फैसल एक भावुक पल याद करते हुए बताते हैं कि जब साकिबुल रणजी ट्रॉफी खेलने जा रहे थे, तब उनकी माँ ने उन्हें तीन नए बैट थमाते हुए कहा था “जाओ मेरे लाल, और तीन शतक लगाकर ही वापस आना.” वह महज़ एक दुआ नहीं, बल्कि एक माँ का अटूट विश्वास था, जिसे साकिबुल ने मैदान पर सच कर दिखाया.

रांची में रिकॉर्ड्स की बारिश

रांची के JSCA ओवल मैदान पर अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ बिहार के कप्तान साकिबुल गनी ने वो कर दिखाया जिसे सालों तक याद रखा जाएगा. उन्होंने महज़ 32 गेंदों में अपना शतक पूरा कर टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे तेज़ शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए.

उनकी यह तूफानी पारी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने सिर्फ 40 गेंदों में नाबाद 128 रन ठोक दिए, जिसमें 10 चौके और 12 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। इस विस्फोटक पारी के साथ ही 26 वर्षीय गनी ने ईशान किशन (33 गेंद बनाम कर्नाटक) के पिछले भारतीय रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया.

वैश्विक स्तर पर पहचान

इस पारी ने साकिबुल गनी को दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। अब वह ‘लिस्ट ए’ क्रिकेट में जेक फ्रेजर-मैकगर्क और एबी डिविलियर्स के बाद दुनिया के तीसरे सबसे तेज़ शतकवीर बन गए हैं.

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मोतिहारी से रिकॉर्ड बुक तक

2 सितंबर 1999 को बिहार के मोतिहारी में जन्मे गनी की क्रिकेट यात्रा किसी पॉश एकेडमी से नहीं, बल्कि स्थानीय मैदानों की धूल से शुरू हुई थी. एक उपयोगी मध्यम गति के गेंदबाज और धाकड़ बल्लेबाज के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई.

साकिबुल ने अपने रणजी डेब्यू पर ही इतिहास रच दिया था, जब उन्होंने मिजोरम के खिलाफ 341 रन बनाए थे. वह दुनिया के पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिसने अपने फर्स्ट-क्लास डेब्यू पर ही तिहरा शतक जड़ा हो.

आंकड़े गवाह हैं

हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड्स का अंबार लगाने के बावजूद, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की चमक-धमक अभी भी उनसे दूर है. उनके आंकड़े उनकी काबिलियत की गवाही खुद देते हैं:

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट: 28 मैचों में 2,035 रन (5 शतक, 8 अर्धशतक)

लिस्ट ए क्रिकेट: 33 मैचों में 867 रन

साकिबुल गनी की यह पारी आईपीएल फ्रेंचाइजी और चयनकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि बिहार का यह सितारा अब बड़ी छलांग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है.

Shivani Singh

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