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संघर्षग्रस्त, गरीब होने के बाद भी इस देश की करेंसी भारत से निकली आगे…अमेरिका को दे रही टक्कर!

Asian Currency Comparison: भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। भारत की जीडीपी दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतरिक्ष से लेकर व्यापार तक, हर क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है। लेकिन इसके बावजूद, एशिया में एक ऐसा देश भी है, जो गरीब होने के बावजूद, भारत से ज़्यादा मजबूत है।

Published by Shubahm Srivastava

Asian Currency Comparison: आज के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। भारत की जीडीपी दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतरिक्ष से लेकर व्यापार तक, हर क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी ओर, देश के लिए बुरी खबर यह है कि भारतीय रुपये में लगातार गिरावट आ रही है। अमेरिकी टैरिफ और दुनिया में चल रहे व्यापार युद्ध के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह और कमज़ोर हुआ है। रुपये ने 88.33 का नया रिकॉर्ड बनाया है, जबकि शुक्रवार को यह 88.30 के स्तर पर था। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ दिनों में रुपये का मूल्य 87.65 से 88.45 के बीच रहने की संभावना है, यानी इसमें और गिरावट की संभावना है।

लेकिन इसके बावजूद, एशिया में एक ऐसा देश भी है, जो गरीब होने के बावजूद, भारत से ज़्यादा मजबूत है, आइए जानते हैं इसके बारे में-

अफगानिस्तान निकला भारत से आगे

भारत के पड़ोसी देश अफग़ानिस्तान ने हाल के दिनों में बहुत कुछ देखा है। अमेरिकी सेना के जाने से लेकर काबुल में तालिबान के सत्ता में आने तक, इस देश ने बहुत कुछ देखा है। इसके बावजूद, इसकी मुद्रा अफगानिस्तानी (AFN) विदेशी मुद्रा बाज़ार में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हैरानी की बात यह है कि आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता के कारण कमज़ोर मानी जाने वाली अफगान मुद्रा ने भारतीय रुपये (INR) को पीछे छोड़ते हुए डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

अफगान मुद्रा की मजबूती पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति न केवल अफग़ानिस्तान की मौद्रिक नीतियों का नतीजा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहायता और प्रवासी प्रेषण (प्रवासियों द्वारा अपने देश भेजे जाने वाले धन) का भी असर है।

अफगानी करेंसी के मजबूत होने के पीछे का कारण

विशेषज्ञों की माने तो अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक ने मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित किया, जिससे अफगानी स्थिर और मजबूत बनी। इसको अलावा देश में रहने वाले प्रवासियों और विदेशों से आने वाली धनराशि ने स्थानीय मुद्रा की मांग में इजाफा किया। संघर्षग्रस्त देश को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों से वित्तीय मदद भी मिली, जिससे  विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली।

अफगानिस्तान-भारत की करेंसी पर एक नजर

इन सभी नीतियों के चलते, अफगानिस्तानी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई और हाल के महीनों में लगभग 1.26-1.29 भारतीय रुपये पर स्थिर रही। यह स्थिति अफगानिस्तानी मुद्रा को भारतीय रुपये के मुकाबले और भी ज्यादा मूल्यवान बनाती है।

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Shubahm Srivastava
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