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मृत्यु के बाद किन्नरों को पीटा जाता है जूते-चप्पलों से! परंपरा जानकर रह जाएंगे आप भी दंग

Kinnar Death: मौत के बाद किन्नरों के उनके शव को जूते-चप्पलों से पीटा जाता हैं. यह परंपरा और इसके पीछे की धारणा क्या है. चलिए जानते हैं चौका देने वाला रहस्य

Published by chhaya sharma

Kinnar Death Rituals: सनातन धर्म में किन्नरों को एक विशेष दर्जा प्राप्त है. उन्हें शुभ और मंगलकारी माना जाता है. कहा जाता है कि किन्नरों की दुआएं और आशीर्वाद किसी को भी भाग्यशाली बना सकती है. इसलिए घर में कोई भी शुभ कार्य हो उसमें किन्नरों को को जरूर बुलाया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. घर में किसी भी बच्चे का जन्म होता है, तो किन्नर उस घर में जाते हैं बधाइयां देते हैं, ताकि उस नवजात की उम्र लंबी हो और उसका भाग्य चमके. घर में कोई शादी होती है तब भी किन्नर आते हैं और नए विवाहित जोड़ो को शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर किसी किन्नरों की मृत्यु होती है, तो उसके शव को जूते-चप्पलों से पीटा जाता है. 

किन्नरों के अंतिम संस्कार की परंपरा

दरअसल, किन्नरों के अंतिम संस्कार की परंपराएं बाकी समाज से बेहद अलग होती है. इसी वजह से उनके अंतिम संस्कार से जड़ी परंपराएं से जुड़े कई सवाल उठते हैं, जैसे किन्नरों का अंतिम संस्कार रात में ही क्यों किया जाता है? किसी किन्नरों की मृत्यु होने के बाद वे जश्न क्यों मनाते हैं, मृत्यु के बाद किन्नरों के शव को जूते-चप्पलों से क्यों पीटा जाता है? चलिए जानते हैं यहां इन सभी सवालों के जवाब. 

 किन्नरों को पहले ही पता लग जाता है मृत्यु का

किन्नर समुदाये का मानना है कि उन्हें, मृत्यु का पहले से ही पूर्वाभास हो जाता है और जब उन्हें महसूस होता है कि उनकी मृत्यु होने वाली है, तो वो खाना पीना बंद कर देते हैं और ईश्वर की उपासना में लीन हो जाते हैं और प्रार्थना करते हैं कि अगले जन्म में उन्हें किन्नर न बनाए.

किन्नरों को जलाया नहीं दफनाया जाता है.

किन्नर समुदाये में मृत शव को जलाया नहीं जाता है, बल्कि दफनाने की परंपरा है. किन्नरों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शव को कफन में लपेटा जाता है, लेकिन बांधा नहीं जाता. किन्नर का मानना है कि आत्मा को बंधन से मुक्त रखना चाहिए, ताकि वह स्वतंत्रता से ईश्वर के पास जा सके.

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किन्नरों का अंतिम संस्कार रात में छीपाकर किया जाता है

किन्नर समुदाये में अंतिम संस्कार रात में इसलिए किया जाता है, ताकि कोई बाहर का व्यक्ति शव को ना देख सके. किन्नरों की मान्यता के अनुसार यदि किसी इंसान ने किन्नर का शव देख, तो वो अगले जन्म में किन्नर के रूप में जन्म ले सकता है. इसलिए उनका अंतिम संस्कार सबसे छीपाकर रात के समय किया जाता है.

मृत्यु के बाद किन्नरों के शव को क्यों चप्पल-जूतों से पीटते हैं?

मृत्यु होने के बाद किन्नरों के शव को जूते-चप्पलों से पीटा जाता है, इसके पीछे की धारणा है कि ऐसा करने से वो अगले जन्म में किन्नर योनि में जन्म नहीं लेते. इसके अलावा मृत्यु के बाद किन्नर के शव को इसलिए भी पीटा जाता है, क्योंकि यह प्रक्रिया काफी पुराने समय से चलती आ रही है. 

मृत्यु के बाद किन्नर क्यों मनाते हैं जश्न 

किन्नर समुदाये मेंमृत्यु के बाद जश्न मनाने की भी परंपरा काफी पुरानी है. इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि आत्मा की मुक्ति होना और ईश्वर से उसके लिए यह प्रार्थना करना है कि उसे अगले जन्म में बेहतर जीवन दें. जश्न में किन्नर दान-पुण्य भी करते हैं.  

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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