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Surya Grahan 2025: 15 दिनों के भीतर पड़ रहा दूसरा ग्रहण, जानिए कब और कहां दिखेगा और क्या बरतनी होगी सावधानी

सितंबर महीने की ही सात तारीख को चंद्रग्रहण पड़ा था जो खग्रास था, अब 15 दिनों के भीतर ही दूसरा ग्रहण पड़ने जा रहा है जो सूर्य पर होगा. अब 21 सितंबर रविवार यानी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सूर्य ग्रहण होगा. ब्रह्मांड में चंद्रग्रहण की स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है और चंद्रमा पर उसकी छाया पड़ने से चंद्रमा की चांदनी नहीं दिखती है. इसी तरह सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता जिसके कारण पृथ्वी की सतह पर छाया हो जाती है और सूर्य का प्रकाश नहीं आ पाता है.

Surya Grahan 2025: सितंबर महीने की ही सात तारीख को चंद्रग्रहण पड़ा था जो खग्रास था, अब 15 दिनों के भीतर ही दूसरा ग्रहण पड़ने जा रहा है जो सूर्य पर होगा. अब 21 सितंबर रविवार यानी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सूर्य ग्रहण होगा. ब्रह्मांड में चंद्रग्रहण की स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है और चंद्रमा पर उसकी छाया पड़ने से चंद्रमा की चांदनी नहीं दिखती है. इसी तरह सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता जिसके कारण पृथ्वी की सतह पर छाया हो जाती है और सूर्य का प्रकाश नहीं आ पाता है.

21 को कैसा होगा सूर्यग्रहण

ग्रहण सामान्य तौर पर खग्रास या खंडग्रास होते हैं जिन्हें पूर्ण या आंशिक भी कहा जाता है. इस बार का सूर्य ग्रहण खंडग्रास या आंशिक होगा यानी सूर्य का बाहरी किनारा ही दिखेगा और बीच का हिस्सा चंद्रमा के कारण ढक जाएगा.   

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सूर्यग्रहण का समय और सूतक

निर्णय सागर पंचांग के अनुसार इस बार सूर्य ग्रहण का स्पर्श रात में 11 बजे से होगा और मध्य रात में 01:12 मिनट पर होगा जबकि मोक्ष भारतीय समयानुसार रात 03: 24 मिनट पर होगा इस तरह सूर्य ग्रहण का प्रभाव करीब साढ़े चार घंटे तक रहने वाला है. ग्रहण के पहले सूतक लग जाता है जिसमें सभी कार्य वर्जित हो जाते हैं, यहां तक कि मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और केवल सत्संग या जाप आदि किया जाता है. इस बीच खानपान या मनोरंजन भी नहीं करना चाहिए. सामान्यतः चंद्रग्रहण में ग्रहण के नौ घंटे पहले और सूर्यग्रहण के समय से 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है.

इन स्थानों पर दिखेगा ग्रहण

इस बार के सूर्य ग्रहण की एक और विशेषता है कि यह पैसिफिक और अटलांटिक ओसियन अर्थात प्रशांत और एटलस महासागर क्षेत्र के अलावा ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में दिखाई पड़ेगा जबकि भारत में यह नहीं दिखेगा. भारत में न दिखने के कारण ग्रहण के यम, नियम, सूतक आदि भी मान्य नहीं होंगे.

Pandit Shashishekhar Tripathi

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