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Som Pradosh Vrat 2025: सोम प्रदोष व्रत पर इस कथा को पढ़ने से होगा लाभ, मिलेगी आपको भगवान शिव की कृपा

Som Pradosh Vrat 2025: प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस कथा के बिना पूजा को अधूरा माना जाता है. इस बार नवंबर महीने में दूसरा सोम प्रदोष व्रत 17 नवंबर को पड़ा था. ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन कौन-सी कथा का पाठ करना चाहिए.

Published by Shivi Bajpai

Som Pradosh Vrat Katha: साल 2025 में 17 नवंबर को सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस दिन भगवान शिव और  माता पार्वती की पूजा करने से आपके ऊपर उनकी कृपा होती है. जिससे जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है. पूजा के दौरान इस कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. माना जाता है कि अगर पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ी जाती है. साथ ही व्रत कथा करना शुभ माना जाता है. 

सोम प्रदोष व्रत का महत्व (Som Pradosh Vrat Ka Mehtav)

सोम प्रदोष व्रत रखने से आपके ऊपर भगवान शिव की कृपा होती है. अगर आप जीवन में सभी दुखों से मुक्ति चाहते हैं तो पूजा के दौरान इस कथा का पाठ कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को पढ़ने से आपको धन संबंधी और करियर संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. 

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सोम प्रदोष व्रत की कथा (Som Pradosh Vrat Katha)

सोम प्रदोष व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, किसी नगर में एक ब्राह्मणी रहा करती थी. उसके पति का देहांत हो चुका था. पति की मृत्यु के बाद ब्राह्मणी अकेली थी. ब्राह्मणी और उसका पुत्र भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करते था, क्योंकि किसी भी प्रकार का रोजगार उनके पास नहीं था. ब्राह्मणी बहुत बुरे हालात में थी, लेकिन वो प्रदोष का व्रत हमेशा किया करती थी. ऐसे ही उसका और उसके पुत्र का जीवन चल रहा था.

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एक बार ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर वापस घर को लौट रही थी, तभी उसको एक युवक रास्ते में दिखा, जोकि घायल था. घायल युवक को ब्राह्मणी अपने घर ले आई. यह युवक विदर्भ राज्य का राजकुमार था जो शत्रुओं से बच रहा था. उसके पिता को बंदी बना लिया गया था. राजकुमार ब्राह्मणी और उसके पुत्र के साथ रहने लगा. एक बार एक गंदर्भ कन्या की नजर राजकुमार पर पड़ी और वो उस पर मोहित हो गई.

गंदर्भ कन्या का नाम अंशुमति था. उसने अपने माता-पिता को राकुमार के बारे में बताया. फिर एक दिन स्वप्न में अंशुमति के माता-पिता को भगावन शिव ने आदेश दिए कि वो अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार से करें. इसके बाद अंशुमति के माता-पिता ने राजकुमार के साथ उसका विवाह करा दिया. इसके बाद गंदर्भ राजा के साथ मिलकर राजकुमार ने अपने शत्रुओं पर विजय हासिल कर ली.

इसके बाद राजकुमार ने ब्राह्मणी के पुत्र को अपने राज्य का राजकुमार बना दिया. ब्राह्मणी के अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई. ये सब ब्राह्मणी द्वारा किए जा रहे प्रदोष व्रत के प्रभाव से हुआ. महादेव ने जैसे ब्राह्मणी और उसके पुत्र पर कृपा की वैसे ही वो सभी का कल्याण करते हैं.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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