Categories: धर्म

Maa Kushmanda Ki Katha: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की इस कथा को पढ़ने से होंगी सारी मनोकामनाएं पूर्ण

Maa Kushmanda: शारदीय नवरात्रि की शुरूआत 22 सितंबर से हो चुकी है. ये पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है. इस समय मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने का विशेष महत्व है. माता रानी के हर रूप का अलग महत्व है. तो आज जानेंगे मां दुर्गा के चौथे रूप मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करनी चाहिए?

Published by Shivi Bajpai

Shardiya Navratri Day 4: शारदीय नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. ये पर्व माता रानी की असीम भक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस बार नवरात्रि 10 दिन की पड़ रही है क्योंकि इस बार 24 और 25 सितंबर दोनों ही दिन तृतीया तिथि पड़ी थी इस वजह से 26 सितंबर, शुक्रवार के दिन को चतुर्थी तिथि के रूप में मनाया जाएगा. तो आइए जानते हैं कि इस दिन आपको मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करनी चाहिए ताकि आपको माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त हो सके.

धार्मिक मान्यता के अनुसार घर में मां कूष्मांडा का आगमन सुख-शांति का प्रतीक है. कूष्मांडा माता को ब्रह्मांड का निर्माण करने वाली देवी कहा जाता है. जो लोग इस साल नवरात्र का व्रत कर रहे हैं उन्हें खासतौर पर आज के दिन मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. तो आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की कथा के बारे में.

Related Post

Navratri 2025: नवरात्रि की चतुर्थी तिथि आज भी मान्य, जानें मां कूष्मांडा की आरती

मां कूष्मांडा की व्रत कथा क्या है?

शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में त्रिदेव ने सृष्टि की रचना का संकल्प लिया था. उस समय उन्होंने संपूर्ण ब्रह्मांड में घने अंधकार को मिटाकर समस्त सृष्टि को शांत किया था. इस स्थित में त्रिदेव ने जगत जननी आदिशक्ति माता से सहायता मांगी थी. जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा को कहा गया है जिन्होंने तुरंत ब्रह्मांड की रचना की थी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपनी हल्की मुस्कान से उन्होंने सृष्टि की रचना कर दी थी.

मां के चेहरे की मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशमय हो गया. इस प्रकार मां की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण जगत जननी आदिशक्ति को मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है. मां का निवास स्थान सूर्य लोक पर है. शास्त्रों के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती हैं. ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली मां कुष्मांडा के मुखमंडल पर जो तेज है, वही सूर्य को प्रकाशवान बनाता है. मां सूर्य लोक के भीतर और बाहर हर स्थान पर निवास करने की क्षमता रखती हैं.

Shardiya Navratri 2025: कहीं आज आप पांचवीं नवरात्रि तो नहीं मना रहे? रुकिये आज है चौथा नवरात्र का पूजन

Shivi Bajpai

Recent Posts

Gold Price March 6: आज 6 मार्च को कैसा है सोने का हाल, दाम गिरे या बढे, जानें यहां?

Gold Price March 6: आज अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो हम…

March 6, 2026

Nepal Election 2026 Results Live Updates: नेपाल की 165 सीटों  पर मतगणना जारी; पूर्व पीएम पिछड़े; बालेन शाह ने चौंकाया

Nepal Election 2026 Results Live Updates: हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के इस चुनाव में लगभग 60…

March 6, 2026

Silver Price Today: US-Iran संकट के बीच चांदी ने पकड़ी रफ्तार, MCX पर कीमतों में बड़ा जंप

Silver Rate Today: शुक्रवार, 6 मार्च को चांदी की कीमतों में तेज़ी आई क्योंकि इन्वेस्टर्स…

March 6, 2026

India vs England: 2 साल बाद सूर्या की तरह अक्षर ने कैसे लिखी जीत की कहानी, देखें वीडियो

India vs England: टी20 विश्व कप 2026 सेमीफाइनल में अक्षर पटेल ने शानदार फील्डिंग, तीन…

March 6, 2026

Mojtaba Khamenei: औलाद पैदा नहीं कर सकते थे मोजतबा खामेनेई! कर रखीं थीं कई शादियां, नए सुप्रीम लीडर को लेकर खुले बड़े राज़

Iran-Israel War: US डिप्लोमैट द्वारा लीक की गई जानकारी में कहा गया कि, मोजतबा खामेनेई…

March 6, 2026