Shab-e-Barat Mubarak 2026: शब-ए-बारात, जिसे माफ़ी की रात भी कहा जाता है, ये एक ऐसी इबादत की रात है जो इस्लाम में बहुत ज़्यादा आध्यात्मिक महत्व रखती है. बता दें कि शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाने वाली इस रात के बारे में माना जाता है कि इस रात में अल्लाह अपने मानने वालों पर रहमत, माफ़ी और बरकत बरसाते हैं.
इस रात मुस्लिम रात भर नमाज़ पढ़ते हैं, कुरान पढ़ते हैं और पिछले गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं. कई लोग गुज़रे हुए लोगों की आत्माओं के लिए दुआ करने के लिए कब्रिस्तान भी जाते हैं, दान देते हैं और परिवार और पड़ोसियों के साथ बांटने के लिए खास मिठाइयां बनाते हैं. यह रात आत्म-मंथन, पछतावा करने और आने वाले साल के लिए शांति की तलाश करते हुए अपने विश्वास को मज़बूत करने के लिए प्रेरित करती है. वहीं अगर आप अपनों को कुछ खास अंदाज में शब-ए-बारात की मुबारकबाद देना चाहते हैं तो ये आपके लिए बेहतरीन संदेश होने वाले हैं.
शब-ए-बारात मुबारक विशेज (Shab-e-Barat Wishes 2026)
1- शब-ए-बारात की रात आई है, रहमते अपने संग लाई है,
मगफिरत की घड़ियां बरकतें लुटा रही हैं,
दुआ है आप पर रहमतें बरसती रहें।
आप सभी को शब-ए-बारात मुबारक!
2- शब-ए-बरात का ये प्यारा मौका,
अल्लाह से रहमतें पाने का मौका,
दुआ है आपके सारे गुनाह माफ हों और आपकी जिंदगी खुशियों से भर जाए।
शब-ए-बारात मुबारक!
3- इस मुकद्दस रात में अल्लाह आपकी तमाम दुआओं को कबूल करे,
आपकी जिंदगी को बरकतों से भर दे और आपके सारे गुनाह माफ कर दे।
शब-ए-बारात की बहुत-बहुत मुबारकबाद!
4- गुनाहों से तौबा का मौका मिला है,
रहमतों का साया सिर पर तना है,
दुआ करो इस शब-ए-बारात में,
अल्लाह हम पर भी मेहरबान बना है।
5- शब-ए-बारात आई है रोशनी लेकर,
मिटा देगी अंधेरा हर गुनाह का,
खुला है रहमत का दरवाजा हर एक के लिए,
मांग लो जो भी चाहो अपने खुदा से।
6- अल्लाह आपकी हर दुआ को कुबूल करे,
आपकी जिंदगी को खुशियों से भर दे और आपकी तकदीर को रोशन कर दे।
शब-ए-बारात की ढेरों मुबारकबाद!
7- इस मुबारक रात में दिल से दुआ करें,
अल्लाह अपने बंदों की दुआएं जरूर सुनता है।
शब-ए-बारात की रहमतें आप पर बरसें!
8- रिश्तों में मोहब्बत बनी रहे,
हर जुबां पर दुआ सजी रहे,
अल्लाह से यही गुजारिश है,
हर इंसान के दिल में रहमत रही रहे।
9- अल्लाह से दुआ है हमारी,
हमेशा सलामत रहे दोस्ती हमारी,
अगर हो गई हो गुस्ताखी हमसे,
हम मांगते हैं दिल से माफ़ी तुमसे।
10- शब-ए-बारात की रोशनी में,
हर एक दुआ कुबूल होती है,
जो झुक जाए अल्लाह के दर पर,
उसकी हर मुश्किल दूर होती है।
11- दुआओं की महफ़िल सजी है,
रहमत की बारिश हुई है,
खुदा से तौबा कर लो दोस्तों,
ये शब-ए-बारात की घड़ी है।
12- शब-ए-बारात की रोशनी में,
हर एक दुआ कुबूल होती है,
जो झुक जाए अल्लाह के दर पर,
उसकी हर मुश्किल दूर होती है।

