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Rangbhari Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर ऐसे करें व्रत और पूजा, जानें महत्व, सामग्री और संपूर्ण विधि

Rangbhari Ekadashi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के वृक्ष का विशेष महत्व माना जाता है. i

Published by Ranjana Sharma

Rangbhari Ekadashi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इसे आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

आंवला वृक्ष से जुड़ी है खास मान्यता

आमलकी एकादशी का संबंध आंवले के वृक्ष से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है. शास्त्रों में आंवले को पवित्र, औषधीय और दिव्य गुणों से युक्त बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने, उसका सेवन करने और आंवले का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. आंवले के वृक्ष की पूजा से पापों का क्षय होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

पूजा में आवश्यक सामग्री

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्रियां रखनी चाहिए. इनमें शामिल हैं— आंवले का वृक्ष या आंवला फल, भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर, एक चौकी और उस पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा, दो दीपक (एक कलश स्थापना के लिए और दूसरा आरती के लिए), जल से भरा लोटा, सुपारी, हल्दी, लौंग, इलायची, पीले पुष्प, आम या अशोक के पांच पत्ते, कलावा, कपूर, सिंदूर, तिल, गुलाल, फलाहार के लिए मिठाई और तुलसी दल.

ऐसे करें आमलकी एकादशी की पूजा

यदि आप इस दिन व्रत रखती हैं तो प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले या लाल वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान के समक्ष घी का दीपक जलाएं और पीले फूल अर्पित करें. साथ ही अक्षत और तुलसी दल अर्पित करना न भूलें, क्योंकि विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है.

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आंवले के वृक्ष की परिक्रमा का महत्व

इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा कर उसकी सात बार परिक्रमा करने का विधान है. यदि घर के आसपास आंवले का पेड़ उपलब्ध न हो, तो आंवले का फल भगवान विष्णु को अर्पित कर वृक्ष का ध्यान करते हुए पूजा की जा सकती है.

व्रत कथा और आरती का विशेष महत्व

आमलकी एकादशी के दिन व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है. कथा सुनने या पढ़ने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है.

व्रत से मिलते हैं ये शुभ फल

धार्मिक मान्यता है कि आमलकी एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति मिलती है. यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है. इसलिए भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं.

Ranjana Sharma
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