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Falgun Amavasya 2026: अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग, जानें क्यों लगाई हैं पितरों के नाम की डुबकी

Surya Grahan 2026: त्रिवेणी संगम वह पवित्र स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है. इसे “अक्षय क्षेत्र” कहा गया है.

Published by Shubahm Srivastava
Falgun Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या पड़ रही है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस बार इस तिथि पर सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है. अमावस्या को दान, स्नान, जप, तप और पितृ तर्पण के लिए सर्वोत्तम दिन माना गया है. विशेष रूप से तीर्थराज प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

अक्षय क्षेत्र का महत्व

त्रिवेणी संगम वह पवित्र स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है. इसे “अक्षय क्षेत्र” कहा गया है. अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो. मान्यता है कि यहाँ किया गया दान-पुण्य, स्नान या पूजा जन्म-जन्मांतर तक फल प्रदान करती है. फाल्गुन अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और पितरों की आत्मा को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी कारण लोग अपने पूर्वजों के नाम से पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं.

पितरों की मुक्ति

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रयागराज को पितरों की मुक्ति का द्वार कहा जाता है. शास्त्रों में वर्णित है कि जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से संगम में अपने पितरों के निमित्त स्नान, श्राद्ध और तर्पण करता है, उसके पूर्वजों को नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और उन्हें पितृ लोक में स्थान प्राप्त होता है. ऐसा भी माना जाता है कि यहाँ किया गया तर्पण कई पीढ़ियों का उद्धार कर देता है. संगम की पवित्र मिट्टी और जल आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करने की क्षमता रखते हैं.

सनातन धर्म में तीर्थ का महत्व

सनातन धर्म में तीर्थ वह स्थान है जहाँ जाने मात्र से आत्मा शुद्ध हो जाती है. संगम क्षेत्र को स्वर्ग की सीढ़ी की उपमा दी गई है. अमावस्या या पितृ पक्ष में यहाँ किया गया पिंडदान और दीपदान सीधे पितृ लोक तक पहुँचता है. श्रद्धा से किया गया कर्म पितृ दोष को शांत करता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है.

फाल्गुन अमावस्या पर विशेष कार्य करना शुभ

फाल्गुन अमावस्या पर कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है. प्रातः सूर्योदय के समय पवित्र नदी में स्नान करें. तिल और जल से पितरों का तर्पण करें. ग्रहण के संयोग के कारण अन्न, तिल और वस्त्रों का दान विशेष फलदायी रहेगा. संध्या समय पीपल वृक्ष के नीचे या नदी तट पर दीप जलाना भी अत्यंत पुण्यदायक माना गया है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. inkhabar इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
Shubahm Srivastava

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