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Mahashivratri Pooja: महाशिवरात्रि का व्रत कैसे रखें? इन बातों का रखें विशेष ध्यान, जानें भगवान शिव को प्रसन्न करने के सही नियम

Mahashivratri Pooja: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं.

Published by Ranjana Sharma

Mahashivratri Pooja: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व आस्था, तप और साधना का विशेष दिन माना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था. देशभर के शिव मंदिरों में इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव को प्रसन्न करने की कामना करते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस पावन दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए, ताकि व्रत और पूजा का पूर्ण फल मिल सके.

क्या करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है. इसके बाद शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाया जाता है. कई श्रद्धालु दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक भी करते हैं. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है. ध्यान रहे कि बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा हुआ होना चाहिए. इसके अलावा धतूरा, भांग, आक के फूल और सफेद चंदन भी अर्पित किए जाते हैं. पूरे दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना शुभ फलदायी माना जाता है. कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार लेकर उपवास करते हैं. रात में जागरण कर शिव पुराण, शिव चालीसा या भजन-कीर्तन करने की परंपरा भी है.

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क्या न करें

वहीं, इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. व्रत के दौरान मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. पूजा में अशुद्ध या कटे-फटे बेलपत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. कई मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी अर्पित नहीं की जाती. इसके साथ ही दिनभर क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से बचना चाहिए. झूठ बोलना, किसी को अपमानित करना या बुरे विचार रखना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है.

भगवान शिव को ये चीज करती है सबसे ज्यादा प्रसन्न

धार्मिक आस्था है कि सच्चे मन, श्रद्धा और संयम के साथ किया गया व्रत जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है. अविवाहित युवक-युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए उपवास करती हैं. माना जाता है कि बाहरी आडंबर से ज्यादा भगवान शिव को भक्त का सच्चा भाव प्रिय होता है. इसलिए महाशिवरात्रि पर पूजा-पाठ के साथ मन की पवित्रता और आचरण की शुद्धता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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