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Mahabharata story Vidur birth: धर्मराज को क्यों लेना पड़ा मनुष्य जन्म, जानिए किस कुल में हुए थे पैदा, चौंकाने वाली है  कथा

Mahabharata story Vidur birth : महाभारत की इस कथा में महात्मा विदुर के जन्म का रहस्य बताया गया है, जो धर्मराज के श्राप से जुड़ा हुआ है. ऋषि मांडव्य को बिना अपराध के शूली पर चढ़ा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने धर्मराज को अन्यायपूर्ण दंड देने के लिए श्राप दिया.

Published by Ranjana Sharma

Mahabharata story Vidur birth :  हस्तिनापुर में लंबे समय बाद सुख-शांति का दौर शुरू हुआ. देवी सत्यवती की बहुएं अंबिका और अंबालिका गर्भवती थीं. वहीं एक दासी स्त्री भी गर्भधारण कर चुकी थी, जिसे अंबिका ने छलपूर्वक महर्षि व्यास के पास भेजा था. महर्षि व्यास ने सत्यवती को बताया कि अंबिका और अंबालिका भय और संदेह में थीं, इसलिए उनकी संतानें बलवान तो होंगी, लेकिन उनमें कुछ शारीरिक दोष रहेगा. वहीं दासी के गर्भ से जन्म लेने वाला पुत्र अत्यंत बुद्धिमान, नीतिवान और परिवार को संकट से उबारने वाला होगा.

तीनों संतानों का जन्म

समय आने पर अंबिका से धृतराष्ट्र, अंबालिका से पांडु और दासी के गर्भ से महात्मा विदुर का जन्म हुआ. सत्यवती इन तीनों संतानों का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं. महर्षि वैशंपायन ने राजा जन्मेजय को बताया कि महात्मा विदुर वास्तव में धर्मराज के अवतार थे. एक श्राप के कारण उन्हें दासी पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने जीवन भर सत्य और नीति का साथ नहीं छोड़ा.

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जन्मेजय का प्रश्न

यह सुनकर राजा जन्मेजय ने पूछा कि आखिर किस श्राप के कारण धर्मराज को यह जन्म लेना पड़ा और उन्हें इतना कष्ट क्यों सहना पड़ा? महर्षि वैशंपायन ने बताया कि प्राचीन काल में मांडव्य नाम के एक महान ऋषि थे, जिन्होंने कठोर तपस्या और मौन व्रत धारण किया था. एक दिन उनके आश्रम में चोर छिप गए और चोरी का सामान भी वहीं रख दिया. राजा के सैनिकों ने जब आश्रम से चोरी का सामान बरामद किया, तो उन्होंने मांडव्य ऋषि को भी चोर समझकर पकड़ लिया. मौन व्रत के कारण ऋषि कुछ बोल नहीं पाए और उन्हें चोरों के साथ शूली पर चढ़ा दिया गया.

तपस्या की शक्ति और राजा का पश्चाताप

चोरों की मृत्यु हो गई, लेकिन मांडव्य ऋषि अपने तपोबल से जीवित रहे. जब राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उसने ऋषि से क्षमा मांगी. ऋषि ने क्षमा कर दिया, लेकिन शूल का हिस्सा उनके शरीर में ही रह गया, जिससे वे अणि मांडव्य कहलाए. ऋषि मांडव्य ने धर्मराज से पूछा कि उन्हें यह दंड क्यों मिला. धर्मराज ने बताया कि बचपन में उन्होंने एक कीड़े को कष्ट दिया था, उसी का फल मिला. इस पर ऋषि ने इसे अन्याय बताते हुए धर्मराज को श्राप दिया कि वे मनुष्य रूप में शूद्र माता के गर्भ से जन्म लेंगे और जीवन भर अन्याय सहेंगे. इसी श्राप के कारण धर्मराज ने महात्मा विदुर के रूप में जन्म लिया. उन्होंने जीवन भर न्याय, नीति और सत्य का पालन किया, भले ही उन्हें कई कष्टों का सामना करना पड़ा.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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