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Magh Purnima Vrat Katha: माघ पूर्णिमा आज, इस कथा के बिना अधूरा है पूर्णिमा का व्रत

Magh Purnima 2025: माघ माह की पूर्णिमा का व्रत आज किया जा रहा है. इस दिन व्रत भगवान विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में खुशियों का वास होता है. इस दिन जरूर करें माघ पूर्णिमा की कथा का पाठ.

Published by Tavishi Kalra

Magh Purnima Vrat Katha: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है. साल में कुल 12 पूर्णिमा पड़ती हैं. आज यानि 1 फरवरी 2026, रविवार को माघ माह की पूर्णिमा तिथि है. इस दिन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. इस दिन रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन लोग व्रत करते हैं और सत्यानारायण कथा का पाठ करते हैं. इस दिन व्रत को कथा के बिना अधूरा माना जाता है. यहां पढ़ें संपूर्ण व्रत कथा.

माघ पूर्णिमा व्रत की पौराणिक कथा

माघ पूर्णिमा को लेकर शास्त्रों में कुछ कथाएं बताई गई हैं. इनमें से एक हैं शुभव्रत ब्राह्मण की कथा. माघी पूर्णिमा की इस कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के किनारे एक विद्वान ब्राह्मण निवास करता था, जिसका नाम शुभव्रत था. कथा में वर्णित है कि शुभव्रत इतना विद्वान होने के बावजूद बहुत ही लालची स्वभाव का व्यक्ति था. वह बस किसी न किसी तरह धन कमाने में यकीन रखता था, चाहे तरीका कोई भी हो. इसी कारण शुभव्रत समय से पूर्व ही वृद्ध दिखने लगा और कई तरह की बीमारियों ने भी उसे घेर लिया था. हालांकि, उसे समय रहते सद्बुद्धि आई और उसने सोचा कि पूरा जीवन तो धन कमाने में बीत गया, लेकिन अब जीवन का उद्धार कैसे हो सकेगा. 

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यही सब विचार करते करते उसे माघ के महीने में पवित्र नदी के तट पर स्नान का महत्व बताने वाला एक श्लोक याद आया. इसके बाद स्नान का संकल्प लेकर ब्राह्मण शुभव्रत नर्मदा नदी में स्नान करने लगा. उसने करीब 9 दिनों तक नदी पर जाकर स्नान किया. इसके बाद शुभव्रत की तबियत और ज्यादा बिगड़ गई और उसकी मृत्यु का समय भी नजदीक आ गया. शुभव्रत सोच रहा था कि आज तक जीवन में उसने कोई अच्छी कार्य नहीं किया, तो अब मृत्यु के बाद नरक में ही जाना पड़ेगा, लेकिन इसके वितरित उसे मोक्ष मिला. क्योंकि शुभव्रत ने माघ मास में पवित्र नदी में जाकर स्नान किया, जिसके कारण अंत समय में लालची ब्राह्मण पर भगवान विष्णु ने कृपा बरसाई और ब्राह्मण के लिए मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त हुए. 

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