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4 या 5 नवंबर? आखिर किस दिन मनाई जाएगी देव दीपावली! जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्त्व

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली का महापर्व माना जाता है. इस दिन का स्नान, दान और दीपदान सभी पापों का नाश कर अक्षय पुण्य प्रदान करता है. जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्र अर्घ्य का समय.

Published by Shivani Singh

हिंदू सनातन परंपरा में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र माना गया है, और इस महीने की पूर्णिमा तो मानो स्वयं देवताओं का उत्सव लेकर आती है. इस दिन दीपों की रोशनी केवल घरों में ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के भावों में भी जगमगाती है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया एक छोटा सा दीपदान भी अनंत पुण्य देने वाला होता है. यही कारण है कि इस तिथि को देवताओं की दिवाली, देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देवताओं का पर्व देव दीपावली मनाया जाता है, जब सभी देवता काशी में गंगा तट पर दीप जलाकर भगवान विष्णु और महादेव की पूजा करते हैं.

इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा किस दिन है, क्या है इसका शुभ मुहूर्त. आइए जानते हैं…

4 या 5 नवंबर कब है कार्तिक पूर्णिमा

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को रात 10:36 बजे से 5 नवंबर को शाम 6:48 बजे तक रहेगी. उदिया तिथि होने के कारण कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर को मनाई जाएगी.

देव दीपावली कब मनाएँ और चंद्रमा को अर्घ्य कब दें

कार्तिक पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जाती है, बल्कि इस दिन देव दीपावली का भव्य उत्सव भी मनाया जाता है. इस वर्ष पंचांग के अनुसार, देव दीपावली या प्रदोषकाल का सबसे शुभ समय शाम 5:15 बजे से 7:50 बजे तक रहेगा. इस दौरान लगभग ढाई घंटे तक विधिवत पूजा-अर्चना और दीपदान किया जा सकता है. ऐसा माना जाता है कि इस समय देवता अपनी दिव्यता प्रकट करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होते हैं, इसलिए इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं. कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र देव की पूजा और अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है. इस वर्ष चंद्रोदय शाम 5:11 बजे होगा. इस समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और विशेष अनुष्ठान करने से मानसिक शांति, सुख, समृद्धि और परिवार में सद्भाव की प्राप्ति होती है. व्रत और दान के साथ चंद्र देव की यह पूजा पुण्य की मात्रा को और बढ़ा देती है.

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कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को हिंदू धर्म में देव दिवाली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस दिन तीन राक्षसों – संपतसुर, रूपासुर और महामालसुर – का वध किया था, इसलिए यह भगवान शिव के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त, यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और दिवाली मनाते हैं. इस दिन गंगा और अन्य पवित्र जलाशयों में स्नान, ध्यान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. विशेष रूप से दान और दीपदान करने से सभी पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. संध्या काल में दीप जलाने का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसे देवताओं का स्वागत करने और उनके प्रति भक्ति व्यक्त करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता है. इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा न केवल धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना का दिन है, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और सामाजिक दान का भी दिन है.

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