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Diwali 2025: भारत के इन हिस्सों में नहीं मनाई जाती दिवाली, जानिए इसके पीछे की रोमांचक वजह

Diwali 2025 : भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जहां हर क्षेत्र की अपनी अनूठी संस्कृति, परंपराएं और मान्यताएं हैं. दिवाली जैसे प्रमुख त्यौहार जहां भारत के अधिकांश हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, वहीं कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां इसे नहीं मनाया जाता. इस लेख में, हम इन जगहों पर दिवाली क्यों नहीं मनाई जाती और इसके पीछे के रोचक कारणों पर चर्चा करेंगे.

लाहौल और स्पीति, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख क्षेत्र, लाहौल और स्पीति, इस क्षेत्र में नहीं मनाया जाता. इसका मुख्य कारण मौसम और प्रकृति से जुड़ा है. यहां सर्दियां बहुत ज्यादा होती हैं और सर्दियों के आगमन के साथ ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं. चूंकि लाहौल और स्पीति के लोग ज्यादातर बौद्ध हैं, इसलिए वे भारतीय कैलेंडर के अनुसार दिवाली के बजाय “लोसर” मनाते हैं, जो नए साल के आगमन का प्रतीक है. लोसर त्योहार के दौरान, लोग पारंपरिक नृत्य करते हैं और नए साल का स्वागत करते हैं.

केरल के कुछ इलाकों में भी दिवाली नहीं मनाई जाती

दक्षिणी भारतीय राज्य केरल में भी, कुछ इलाके ऐसे हैं जहां दिवाली नहीं मनाई जाती. केरल में, ऐसा माना जाता है कि उनके महान राजा महाबली की मृत्यु दिवाली के दिन हुई थी. केरल के लोग राजा महाबली के प्रति अत्यधिक आदर रखते हैं और उनकी स्मृति में ओणम का त्योहार मनाया जाता है. दिवाली उनके लिए शोक का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इसे त्योहार के रूप में नहीं मनाया जाता. एक अन्य कारण यह है कि अक्टूबर और नवंबर के महीनों में केरल में भारी वर्षा होती है. इस कारण पटाखे और दीये जलाना काफी मुश्किल हो जाता है. अधिकांश समय, बारिश दीये और पटाखे जलाने का आनंद नहीं ले पाती. यही कारण है कि यहां दिवाली नहीं मनाई जाती. हालांकि कोच्चि में कुछ लोग दिवाली मनाते हैं, लेकिन राज्य के बाकी हिस्सों में यह आम नहीं है.

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पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से

पश्चिम बंगाल में देवी काली की पूजा का विशेष महत्व है और यहां दिवाली की जगह काली पूजा मनाई जाती है. इसे “श्यामा पूजा” भी कहा जाता है और इस दिन बंगाल में देवी काली की विशेष पूजा की जाती है. हालांकि इस दौरान दीये जलाने की प्रथा है, लेकिन इसे दिवाली जैसा नहीं माना जाता. यह बंगाल की अनूठी संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है, जहाँ शक्ति की देवी काली का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है.

मिजोरम और नागालैंड में ईसाई समुदाय

पूर्वोत्तर भारतीय राज्य मिजोरम और नागालैंड मुख्यतः ईसाई हैं. यहां के लोग क्रिसमस को अपना सबसे बड़ा त्योहार मानते हैं. इसी वजह से, यहाँ दिवाली का त्योहार प्रचलित नहीं है. हालांकि हाल के वर्षों में कुछ शहरों में दिवाली मनाई जाती है, लेकिन इसे पारंपरिक उत्सव के रूप में नहीं देखा जाता.

Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. inkhabar इसकी पुष्टि नहीं करता है

Shivashakti Narayan Singh

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