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Dev Uthani Ekadashi 2025: कल देवउठनी एकादशी पर देवों को कैसे जगाएं जाते हैं, जानें यहां विधि, मंत्र और लोकगीत

Dev Uthani Ekadashi 2025: कार्तिक मास की एकादशी को देवउठनी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी भी कही जाता है. इस दिन देव यानी श्रीहरि को जगने की परंपरा होती है. देवों को जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि अर्पित किये जाते हैं.

Published by chhaya sharma

Dev Uthani Ekadashi 2025 Dev Uthao Vidhi: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती हैं, इसे कई जगहों पर प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है. देवउठनी एकादशी के दिन जगत के पालनहार श्रीहरि 4 माह के बाद योगनिद्रा से जागते हैं. इस दिन देव यानी श्रीहरि को जगने की परंपरा होती है और इस दिन से 4 महीने से रुके सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं.

देवउठनी एकादशी के दिन देव को जगाने की परंपरा

देवउठनी एकादशी के दिन देव जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि चीजें भगवान को अर्पित किए जाते हैं. जिससे देव जाग जाए और संसार में मंगल करें. देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि की पूजा से व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के दुख खत्म हो जाते हैं. चलिए जानते हैं यहां देवउठनी एकादशी के दिन देवों को कैसे जगाएं और क्या गाएं

देवउठनी एकादशी के दिन देवों को कैसे जगाएं और क्या गाएं

देवउठनी एकादशी के दिन ओम नमो नारायणाय मंत्र मंत्रों का जाप करके भगवान विष्णु को जगाना चाहिए और  प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए- हे गोविन्द. उठिए, उठिए हे कमलाकान्त ! निद्रा का त्याग कर तीनों लोगों का मंगल करें. इसके साथ शंख ओर नगाड़े आदि भी बजाना चाहिए. इसके बाद देवों को जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि चीजें अर्पित करनी चाहिए. साथ ही घी का दीपक जलाकर थाली बजाकर देवों को जगाना चाहिए. 

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ऐसे जगाए जाते हैं देव

इसके अलावा देव को उठाने के लिए ऐक और परंपरा प्रचलित है- कई जगहों पर लोग आंगन में गन्ने का मंडप बनाया जाता है और सुंदर अल्पना से रंगोली बनाते हैं और इस दौरान कई तरह के पारंपरिक गीत भी गाए जाते है जैसे 

उठो देव, बैठो देव, पाटकली चटकाओ देव.
सबके काज संवारों देव
आषाढ़ में सोए देव, कार्तिक में जागो देव.
कोरा कलशा मीठा पानी, उठो देव पियो पानी.
हाथ पैर फटकारो देव, अंगुलिया चटकाओ देव.
क्वारों के व्याह कराओ देव, व्याहों के गौने कराओ देव.
तुम पर फूल चढ़ाए देव, घी का दिया जलाएं देव.
आओ देव पधारो देव, तुमको हम मनाएं देव.
जागो इस दुनिया के देव, गन्ने का भोग लगाओ देव. जागो उस दुनियां के देव, सिंघाड़े का भोग लगाओ देव.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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